'यह स्टॉक मार्केट में बने रहने का सही समय नहीं', एक्सपर्ट ने बताया अब क्या होनी चाहिए निवेशकों की रणनीति

शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच Indiacharts के फाउंडर रोहित श्रीवास्तव ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यह इक्विटी में बने रहने का सही समय नहीं है। श्रीवास्तव का मानना है कि अभी और भी ज्यादा गिरावट आ सकती है। जानिए क्या होनी चाहिए अब निवेशकों की रणनीति।

अपडेटेड Jan 20, 2026 पर 6:41 PM
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श्रीवास्तव इस समय अपने पर्सनल पोर्टफोलियो में 100 प्रतिशत कैश होल्ड कर रहे हैं।

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ सत्र से बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में निवेशक समझ नहीं पा रहे हैं कि उनकी अगली रणनीति क्या होनी चाहिए। उन्हें बिकवाली करके बाजार से निकल जाना चाहिए, या फिर धीरे-धीरे पैसे लगाना चाहिए। Indiacharts और Strike Money के फाउंडर रोहित श्रीवास्तव ने निवेशकों को अहम रणनीति सुझाई है।

श्रीवास्तव इस समय अपने पर्सनल पोर्टफोलियो में 100 प्रतिशत कैश होल्ड कर रहे हैं। वहीं अपने क्लाइंट्स को उन्होंने सलाह दी है कि वे 30 से 50 प्रतिशत तक कैश बनाए रखें।

ग्लोबल मार्केट में बड़े ट्रेंड रिवर्सल की चेतावनी


मंगलवार को CNBC-TV18 से बातचीत में श्रीवास्तव ने कहा कि ग्लोबल इक्विटी मार्केट्स में यह किसी बड़े या अहम ट्रेंड रिवर्सल की शुरुआती अवस्था हो सकती है।

उन्होंने कहा, 'हम अभी उस फेज के बिल्कुल शुरुआती दौर में हैं, जो आगे चलकर ग्लोबल इक्विटीज में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब तक बाजार की राइड अच्छी रही है, लेकिन अब मामला सिर्फ ट्रेड तक सीमित नहीं रहा है, यह जियोपॉलिटिकल समस्या बन चुका है।'

जियोपॉलिटिक्स के चलते बढ़ेगी अनिश्चितता

रोहित श्रीवास्तव का कहना है कि जियोपॉलिटिकल मुद्दे जल्दी सुलझते नहीं हैं। ऐसे मामलों में अनिश्चितता कई महीनों तक बनी रह सकती है। इसी वजह से आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव तेज रह सकता है।

'यह इक्विटी में रहने का सही समय नहीं'

श्रीवास्तव ने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा हालात में इक्विटी में बने रहना सही रणनीति नहीं है।

उनका कहना है, 'संक्षेप में कहूं तो यह इक्विटीज में रहने का अच्छा समय नहीं है। जितना हो सके उतना कैश तैयार करना चाहिए।'

भारतीय शेयर बाजार में तेज रिवर्सल

भारतीय शेयर बाजार ने भी हाल के दिनों में तेज गिरावट देखी है। नए साल की शुरुआत में निफ्टी 50 जिस रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था, वहां से बाजार में बड़ा रिवर्सल आ चुका है।

2 जनवरी के हाई से अब तक BSE में लिस्टेड कंपनियों का करीब 300 अरब डॉलर का मार्केट कैप खत्म हो चुका है।

ट्रंप के टैरिफ बयान से बिगड़ा माहौल

ग्लोबल मार्केट्स में बिकवाली की एक बड़ी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ को लेकर फिर से तेज बयानबाजी मानी जा रही है।

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो यूरोपीय सहयोगी ग्रीनलैंड को लेकर उनकी योजना का समर्थन नहीं करेंगे, उन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है। ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क के तहत आने वाला एक स्वशासित क्षेत्र है।

ट्रंप के इन बयानों के बाद ग्लोबल मार्केट्स में रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट देखने को मिला। अमेरिकी फ्यूचर्स में तेज गिरावट आई, जबकि वॉल स्ट्रीट के कैश मार्केट्स सोमवार को छुट्टी के कारण बंद थे।

क्या बड़ी गिरावट के लिए तैयार रहे निवेशक?

रोहित श्रीवास्तव का मानना है कि निवेशकों को सबसे खराब हालात को ध्यान में रखकर तैयारी करनी चाहिए।

उनके मुताबिक, 'ग्लोबल इक्विटीज में 10 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट के लिए तैयार रहना चाहिए। पहले तैयारी करना जरूरी है, बाद में यह उम्मीद की जा सकती है कि हालात उतने खराब न हों।'

उन्होंने कहा कि अक्सर निवेशक यह सोचने में समय गंवा देते हैं कि गिरावट कितनी होगी। लेकिन इस सोच से तैयारी नहीं हो पाती। बेहतर है कि पहले जोखिम को मानकर चलें और फिर हालात का आकलन करें।

एक दिन में ₹10 लाख करोड़ की चपत

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। एक ही ट्रेडिंग सेशन में BSE में लिस्टेड कंपनियों ने निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति गंवा दी, जिससे बाजार में डर और सतर्कता दोनों बढ़ गई हैं।

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