भारतीय शेयर बाजार ने हाल ही में नए लाइफटाइम हाई बनाए थे, लेकिन अब भारी गिरावट देखने को मिल रही है। मंगलवार, 20 जनवरी को सेंसेक्स 1000 और निफ्टी 350 अंक से ज्यादा क्रैश कर गया। इससे निवेशकों के ₹10 लाख करोड़ स्वाहा खाक हो गए।
भारतीय शेयर बाजार ने हाल ही में नए लाइफटाइम हाई बनाए थे, लेकिन अब भारी गिरावट देखने को मिल रही है। मंगलवार, 20 जनवरी को सेंसेक्स 1000 और निफ्टी 350 अंक से ज्यादा क्रैश कर गया। इससे निवेशकों के ₹10 लाख करोड़ स्वाहा खाक हो गए।
इस गिरावट ने निवेशकों, खासकर SIP करने वालों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में बाजार एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि मौजूदा हालात में SIP निवेशकों को कैसी रणनीति अपनानी चाहिए।
क्या SIP निवेशकों को घबराना चाहिए?
शेयर बाजार गिरते ही SIP निवेशक अक्सर परेशान हो जाते हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि यही वह दौर होता है जब SIP की असली ताकत सामने आती है।
Master Capital Services Ltd के डायरेक्टर गुरमीत सिंह चावला के मुताबिक, बाजार में करेक्शन के समय SIP करना ज्यादा फायदेमंद होता है। जब बाजार नीचे होता है, तब SIP के जरिए कम दाम पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। इससे लंबी अवधि में रिटर्न और कंपाउंडिंग बेहतर होती है।

उनका कहना है कि बाजार के स्थिर होने का इंतजार करने से कई बार अच्छे मौके निकल जाते हैं। करेक्शन के दौरान SIP जारी रखने से निवेश में अनुशासन बना रहता है। भावनाओं के आधार पर फैसले लेने से बचाव होता है। लंबी अवधि में वेल्थ बनाने के लिए निरंतर निवेश, बाजार को टाइम करने से कहीं ज्यादा जरूरी है।
परफेक्ट एंट्री का इंतजार न करें
Simple Hai के एडिटर-इन-चीफ विवेक लॉ का कहना है कि लाइफटाइम हाई के बाद बाजार का गिरना बिल्कुल सामान्य है। यह निवेश चक्र का ही हिस्सा होता है।
उनके मुताबिक, शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव असहज जरूर लगता है, लेकिन लॉन्ग टर्म निवेशकों को परफेक्ट एंट्री पॉइंट तलाशने से बचना चाहिए। करेक्शन के दौरान धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति है। बजाय इसके कि निवेशक लगातार और बड़ी गिरावट का इंतजार करता रहे।
उन्होंने कहा कि SIP निवेशकों को निवेश जारी रखना चाहिए, क्योंकि गिरावट के समय रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग से लंबी अवधि के रिटर्न बेहतर होते हैं। जिनके पास अतिरिक्त पैसा है, वे अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को देखते हुए SIP की रकम बढ़ा सकते हैं या चरणबद्ध तरीके से निवेश कर सकते हैं।
क्या निवेशकों मौजूदा SIP बंद कर देनी चाहिए?
Anand Rathi Wealth के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अर्जुन गुहा ठाकुरता का मानना है कि मौजूदा गिरावट को बड़ी करेक्शन नहीं कहा जा सकता, क्योंकि बाजार अपने हाई से सिर्फ 3-4 प्रतिशत ही नीचे है।
उनका कहना है कि ऐसे समय में परफेक्ट लेवल का इंतजार करने के बजाय धीरे-धीरे SIP में निवेश बढ़ाना ज्यादा समझदारी भरा कदम है। उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा SIP को किसी भी हाल में बंद नहीं करना चाहिए। अगर स्टेप-अप SIP का विकल्प है, तो उसे अपनाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले बजट के चलते बाजार में कुछ और उतार-चढ़ाव आ सकता है। लेकिन SIP निवेशकों के लिए यह उतार-चढ़ाव फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे समय के साथ बेहतर दामों पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।

एकमुश्त निवेश वालों को क्या करना चाहिए?
जिन निवेशकों के पास एक साथ निवेश करने के लिए बड़ी रकम है, उन्हें पूरा पैसा एक बार में लगाने से बचना चाहिए। मार्केट एक्सपर्ट की सलाह है कि इस रकम को तीन या चार साप्ताहिक हिस्सों में निवेश किया जाए, ताकि एंट्री लेवल औसत हो सके।
अर्जुन गुहा के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार का लॉन्ग टर्म आउटलुक अब भी मजबूत बना हुआ है। मैक्रो इकोनॉमिक संकेतक सपोर्टिव हैं और बाजार पिछले एक साल में समय और कीमत- दोनों स्तर पर एडजस्टमेंट कर चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि इक्विटी पोर्टफोलियो में संतुलन जरूरी है। करीब 50-55 प्रतिशत लार्ज कैप, 20-25 प्रतिशत मिड कैप और बाकी हिस्सा स्मॉल कैप फंड्स में होना चाहिए।
क्या परफेक्ट बॉटम का इंतजार करना चाहिए?
Bonanza की रिसर्च एनालिस्ट खुशी मिस्त्री का कहना है कि नए हाई के बाद आने वाली ऐसी गिरावट आमतौर पर हेल्दी करेक्शन होती है। यह न तो घबराकर बेचने का संकेत है और न ही आक्रामक खरीद का।

उनके मुताबिक, ज्यादातर निवेशकों के लिए ऐसे दौर में SIP जारी रखना और थोड़ी-सी बढ़ोतरी करना, परफेक्ट बॉटम का इंतजार करने से बेहतर रणनीति है। मौजूदा माहौल में अगले 3 से 6 महीनों तक चरणबद्ध निवेश ज्यादा समझदारी भरा तरीका माना जाता है।
उन्होंने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि SIP को रोककर बाजार को टाइम करने की कोशिश, लंबे समय में वेल्थ को नुकसान पहुंचाती है। गिरावट के दौरान SIP जारी रखने से कम दाम पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जो रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग का असली फायदा है।
SIP से कैसे बनेगा मोटा पैसा?
Wealth1 के CEO नरेन अग्रवाल के मुताबिक, लाइफटाइम हाई के बाद करेक्शन आना इक्विटी बाजार का स्वाभाविक हिस्सा है। इतिहास बताता है कि मजबूत बुल मार्केट में भी भारतीय बाजारों में हर 12-18 महीने में 10-15 प्रतिशत की गिरावट आती रही है।
इसके बावजूद, पिछले दो दशकों में निफ्टी 50 ने करीब 12-14 प्रतिशत CAGR रिटर्न दिया है। SIP के आंकड़े भी निवेशकों के भरोसे को दिखाते हैं। भारत में मंथली SIP इनफ्लो अब 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है।
अग्रवाल का कहना है कि करेक्शन के दौरान SIP जारी रखना और लॉन्ग टर्म लक्ष्यों के लिए निवेश बढ़ाना, वैल्यूएशन नरम होने पर बड़ा फायदा देता है। हालांकि, अतिरिक्त निवेश हमेशा निवेशक की जोखिम क्षमता, एसेट एलोकेशन और निवेश अवधि के हिसाब से ही होना चाहिए। अग्रवाल के मुताबिक, लंबी अवधि में वेल्थ बनाने की असली कुंजी धैर्य और सही क्वालिटी के निवेश में ही है।
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