Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में भारी गिरावट, क्या यह है खरीदारी का सही मौका? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ETFs) में आज 22 जनवरी को भारी गिरावट देखने को मिली। टैरिफ को लेकर ग्लोबल चिंताएं कम होने से सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई, जिसका सीधा असर गोल्ड और सिल्वर ETFs पर दिखा। कारोबार के दौरान टाटा सिल्वर ETF में 21 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई और यह दिन के निचले स्तर तक फिसल गया

अपडेटेड Jan 22, 2026 पर 1:33 PM
Gold-Silver ETFs: बिरला सन लाइफ गोल्ड ETF भी कारोबार के दौरान करीब 12 प्रतिशत टूट गया

Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ETFs) में आज 22 जनवरी को भारी गिरावट देखने को मिली। टैरिफ को लेकर ग्लोबल चिंताएं कम होने से सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई, जिसका सीधा असर गोल्ड और सिल्वर ETFs पर दिखा। कारोबार के दौरान टाटा सिल्वर ETF में 21 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई और यह दिन के निचले स्तर तक फिसल गया।

बिरला सन लाइफ गोल्ड ETF भी कारोबार के दौरान करीब 12 प्रतिशत टूट गया, हालांकि बाद में इसमें आंशिक रिकवरी देखने को मिली। बाकी गोल्ड और सिल्वर ETFs में भी इसी तरह की तेज बिकवाली देखने को मिली। इस तेज बिकवाली से निवेशकों के मन में यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है या इनके अभी और नीचे आने का इंतजार करना चाहिए?

आखिर क्यों गिरे गोल्ड और सिल्वर ETFs?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल भू-राजनीतिक तनावों में अचानक आई नरमी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपना आक्रामक पुख कम किया है। ट्रंप ने साफ किया कि वह ग्रीनलैंड को जबरन अपने नियंत्रण में लेने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की योजना भी फिलहाल के लिए टाल दी।


ट्रंप ने दावोस में नाटो के महासचिव मार्क रुटे से भी मुलाकात की और कहा इस मुलाकात में ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर एक ढांचा तय हो गया है। इस बयान के बाद अमेरिका और यूरोप के बीच संभावित टकराव की आशंका काफी हद तक कम हो गई।

VT मार्केट के सीनियर मार्केट एनालिस्ट जस्टिन खो के मुताबिक, गोल्ड और सिल्वर ETFs में आई यह तेज गिरावट किसी फंडामेंटल कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि यह अचानक बदले मैक्रो सेंटीमेंट का नतीजा है। उनके मुताबिक, हालिया गिरावट मुनाफावसूली और पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग को दिखाती है। खासकर ऐसे समय में जब शेयर बाजारों में फिर से तेजी लौट रही है।

इससे पहले पिछले कुछ हफ्तों में सोने और चांदी के दाम में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी। यह तेजी ट्रंप के उन बयानों के बाद आई थी, जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य कार्रवाई और यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इससे अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव बढ़ गया था। इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों में जोखिम से दूर रहने का माहौल बनाया और उन्होंने सोना-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया। इसी वजह से इन धातुओं और उनसे जुड़े ETFs में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली थी।

अब निवेशक क्या करें: खरीदें या इंतजार?

एक्सपर्ट्स की राय इस समय बंटी हुई है। कुछ एक्सपर्ट्स इस गिरावट को खरीदारी का मौका मान रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि बाजार जरूरत से ज्यादा ऊपर जा चुका है। ऐसे में शॉर्ट-टर्म में सतर्क रहने की जरूरत है।

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की एसोसिएट डायरेक्टर तन्वी कंचन का कहना है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद गोल्ड-सिल्वर से जुड़ी फंडामेंटल वजहें मजबूत बनी हुई है। उन्होंने बताया कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी इंडस्ट्रियल डिमांड लगभग रिकॉर्ड स्तर पर है, जो गोल्ड-सिल्वर के भाव को लंबी अवधि में सपोर्ट देती है।

हालांकि, कंचन ने चेतावनी भी दी कि पिछले एक सालों में आई बंपर तेजी के बाद एक ही स्तर पर पूरा निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। उनके मुताबिक, निवेशकों को एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय आने वाले हफ्तों या महीनों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करना चाहिए, ताकि आगे और गिरावट की स्थिति में जोखिम कम किया जा सके।

कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स 5 से 10 प्रतिशत तक का पोर्टफोलियो गोल्ड और सिल्वर ETFs में सिस्टमेटिक तरीके से लगाने की सलाह दे रहे हैं। इससे टाइमिंग का जोखिम घटता है और ऐसे एसेट क्लास में एक्सपोजर बना रहता है जो भू-राजनीतिक अनिश्चितता और मॉनिटरी पॉलिसी के उतार-चढ़ाव से फायदा उठाते हैं।

VT मार्केट के जस्टिन खो का मानना है कि सेंट्रल बैंकों की खरीद, लंबी अवधि की मांग और महंगाई से बचाव जैसे स्ट्रक्चरल फैक्टर्स अब भी बरकरार हैं। ऐसे में अनुशासित निवेशकों के लिए यह करेक्शन रणनीतिक तौर पर जमा करने का मौका हो सकता है, लेकिन मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए शॉर्ट-टर्म सट्टेबाजी से बचना ही बेहतर होगा।

यह भी पढ़ें- शेयर बाजार ने अचानक लिया यू-टर्न, सेंसेक्स दिन के हाई से 700 अंक टूटा, ये हैं 4 बड़े कारण

डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।