Gold Prices: सोने का लगातार क्यों बढ़ रहा दाम? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया जवाब

Gold Prices: सोने की कीमतों में तेजी क्यों थम नहीं रही? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बैंकों की भारी खरीद को बड़ी वजह बताया। भू राजनीतिक तनाव, टैरिफ अनिश्चितता और डॉलर की चाल भी बुलियन को मजबूत आधार दे रही है।

अपडेटेड Feb 23, 2026 पर 3:56 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
वैश्विक बाजार में कॉमेक्स पर सोना 5,157 से 5,182 डॉलर प्रति औंस के दायरे में ट्रेड करता दिखा।

Gold Prices: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि दुनियाभर के केंद्रीय बैंक आक्रामक तरीके से सोना खरीद रहे हैं। इसी के चलते हाल में गोल्ड की कीमतों में आई तेज उछाल की बड़ी वजह है। उनके मुताबिक- यह सिर्फ अस्थायी तेजी नहीं, बल्कि ग्लोबल रिजर्व स्ट्रैटजी में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 फरवरी को भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत कर रही थीं। उन्होंने साफ कहा, 'सोने की कीमत इसलिए बढ़ रही है क्योंकि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक बड़ी मात्रा में इसकी खरीद कर रहे हैं।'

भू राजनीतिक तनाव और टैरिफ का असर


अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दोबारा टैरिफ बढ़ाने की घोषणाओं ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। इसी वजह से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में तेजी बनी हुई है। निवेशक अस्थिरता, मुद्रा में उतार चढ़ाव और शेयर बाजार की कमजोरी से बचने के लिए कीमती धातुओं को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।

MCX पर सोना-चांदी का हाल

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट सोना 1,60,049 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, जो पिछले बंद भाव से 2.02 प्रतिशत ज्यादा था। दिन में बाद में सोना वायदा करीब 1.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,59,239 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। चांदी में और ज्यादा मजबूती रही। इसकी कीमत 4 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 2,63,193 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती

वैश्विक बाजार में कॉमेक्स पर सोना 5,157 से 5,182 डॉलर प्रति औंस के दायरे में ट्रेड करता दिखा। यह पिछले 24 घंटों में लगभग 2 प्रतिशत की तेजी को दर्शाता है। चांदी में भी मजबूत उछाल देखा गया, जो सेफ हेवन डिमांड को दिखाता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि यह तेजी सिर्फ भू राजनीतिक तनाव का नतीजा नहीं है। इसके पीछे संस्थागत खरीद, कमजोर अमेरिकी डॉलर और अन्य मैक्रो आर्थिक कारक भी काम कर रहे हैं।

टेक्निकल लेवल क्या कहते हैं

Enrich Money के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, हाल की गिरावट के बावजूद सोना अभी भी व्यापक अपट्रेंड में है। उन्होंने कहा, 'कॉमेक्स गोल्ड 5,100 से 5,200 डॉलर के दायरे में ट्रेड कर रहा है। इससे पहले 5,500 डॉलर के ऊपर से तेज करेक्शन आया था। यह गिरावट मुनाफावसूली और स्वस्थ कंसोलिडेशन का संकेत है, लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड अभी भी सकारात्मक है।'

उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर 4,650 से 4,800 डॉलर का दायरा मजबूत सपोर्ट जोन के रूप में दिख रहा है। वहीं घरेलू बाजार में MCX गोल्ड 1,45,000 से 1,50,000 रुपये के बीच अहम सपोर्ट बनाए हुए है। अगर कीमतें 1,60,800 रुपये के ऊपर टिकती हैं, तो मध्यम अवधि में सोना 1,65,000 से 1,75,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।

विदेशी निवेश पर मंत्री की टिप्पणी

पूंजी प्रवाह पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक निवेश आम तौर पर स्थिर मैक्रो आर्थिक माहौल और नीतिगत स्पष्टता को देखकर आता है। भारत इन मानकों पर काफी हद तक खरा उतरता है, लेकिन इसके बावजूद विदेशी निवेश हर बार उम्मीद के मुताबिक स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।

कुल मिलाकर, केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितता मिलकर सोने और चांदी की कीमतों को मजबूत आधार दे रहे हैं।

सोने के आयात पर RBI गवर्नर

अलग से RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भले ही सोने की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन हाल के महीनों में सोने के आयात ऑर्डर की कुल वैल्यू में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। यानी कीमतें बढ़ी हैं, पर आयात मात्रा या ऑर्डर वैल्यू में उतनी तेजी नहीं दिखी।

सीतारमण ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए करती रहेगी, क्योंकि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलता है। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था FTA से लाभ उठाए। इसलिए हमने कई देशों के साथ FTA किए हैं और यह आगे भी जारी रहेगा। वैश्विक अनिश्चितता हमेशा से रही है।'

विदेशी पूंजी प्रवाह पर सवाल

विदेशी निवेश को लेकर मंत्री ने कहा कि आम तौर पर वैश्विक पूंजी उन अर्थव्यवस्थाओं में जाती है जहां मैक्रो आर्थिक स्थिरता और नीति में स्पष्टता होती है। भारत इन मानकों पर खरा उतरता है, इसलिए उम्मीद रहती है कि यहां फंड आएं।

लेकिन उन्होंने माना कि हर बार उम्मीद के मुताबिक निवेश नहीं आता। उनके अनुसार इसके पीछे सिर्फ आर्थिक या कारोबारी कारण ही नहीं, बल्कि वैश्विक और राजनीतिक वजहें भी हो सकती हैं। उन्होंने कहा, 'हमें यह देखना होगा कि आखिर कौन से कारक विदेशी फंड को रोक रहे हैं।'

Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में 6% की तेजी, इन 2 वजहों ने पलट दी बाजार की बाजी

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।