Gold-Silver ETF: जून में 12% तक टूटे गोल्ड-सिल्वर ETF, अब क्या करें निवेशक? जानिए एक्सपर्ट्स से
Gold-Silver ETF: गोल्ड और सिल्वर ETF में जून में 12% तक की गिरावट आ चुकी है। क्या यह मुनाफावसूली का मौका है या खरीदारी का? महंगाई, तेल की कीमतों और अमेरिकी ब्याज दरों के बीच एक्सपर्ट्स निवेशकों के लिए क्या रणनीति सुझा रहे हैं, जानिए।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है।
Gold-Silver ETF: जून में अब तक गोल्ड और सिल्वर ETF में 12% तक की गिरावट देखने को मिली है। बढ़ती महंगाई की चिंता, अमेरिका-ईरान तनाव और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने निवेशकों का मिजाज खराब किया है। इसका असर सोने और चांदी दोनों की कीमतों पर दिख रहा है।
सोने पर दबाव क्यों बढ़ा?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। अगर महंगाई बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं।
सोने को महंगाई से बचाव का साधन माना जाता है। लेकिन ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए अच्छी नहीं मानी जातीं। इसकी वजह यह है कि सोना कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में निवेशक दूसरे विकल्पों की तरफ जा सकते हैं।
तकनीकी संकेत भी कमजोर
हाल ही में सोने की कीमत अपने 200-डे मूविंग एवरेज के नीचे फिसल गई। कई निवेशक इस स्तर को अहम मानते हैं। इसके टूटने के बाद बिकवाली और बढ़ गई।
Comex गोल्ड फ्यूचर्स में ओपन इंटरेस्ट भी 2009 के बाद के सबसे निचले स्तरों के करीब पहुंच गया है। इसका मतलब है कि बाजार में निवेशकों की भागीदारी कम हो रही है। ऐसे माहौल में कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
हाल के हफ्तों में गोल्ड ETF की होल्डिंग भी घटी है। इससे साफ है कि कुछ निवेशक फिलहाल सोने में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं।
क्या निवेशक सोने से दूर हो रहे हैं?
जेपी मॉर्गन के पूर्व प्रेशियस मेटल्स ट्रेडर और सलाहकार रॉबर्ट गॉटलीब का कहना है कि यह गिरावट सोने में भरोसा खत्म होने की वजह से नहीं है।
उनके मुताबिक, निवेशक फिलहाल अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं। वे जोखिम कम करना चाहते हैं और नकदी बढ़ा रहे हैं। लगातार बदलती भू-राजनीतिक खबरों और आर्थिक अनिश्चितताओं की वजह से यह रुख देखने को मिल रहा है।
घरेलू बाजार में क्या हुआ?
गुरुवार को MCX पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 277 रुपये गिरकर 1,47,740 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र था, जब सोने में कमजोरी देखने को मिली।
एनालिस्टों का कहना है कि तेल के बढ़े दाम और मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने यह उम्मीद बढ़ा दी है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। इसी वजह से सोने और चांदी पर दबाव बना हुआ है।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
LKP Securities के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, सोना 1,46,500 रुपये के आसपास खुला था। निचले स्तरों पर खरीदारी आई और कीमतें फिर 1,48,000 रुपये के करीब पहुंच गईं। रुपये की कमजोरी ने भी घरेलू बाजार में सोने को कुछ सहारा दिया।
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल में मुनाफावसूली जरूर दिखी है। लेकिन जब तक तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, महंगाई और ऊंची ब्याज दरों की चिंता भी बनी रहेगी। इससे गोल्ड सेंटीमेंट पर दबाव रह सकता है।
FOMC बैठक पर टिकी नजर
Kotak Securities की कमोडिटी रिसर्च एक्सपर्ट कायनात चैनवाला का कहना है कि अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की FOMC बैठक पर है।
अगर फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो सोने पर और दबाव आ सकता है। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने या कम होने से भी सोने और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
क्या है एक्सपर्ट की सलाह?
Julius Baer के कार्स्टन मेंके का मानना है कि अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर स्थिति साफ होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल सोने और चांदी की दिशा महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ब्याज दरों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए।
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