इनवेस्टमेंट फर्म गोल्डमैन सैक्स ने भारतीय शेयरों की रेटिंग 'ओवरवेट' से घटाकर 'न्यूट्रल' कर दी है। इनवेस्टमेंट फर्म के मुताबिक, अगले 3-6 महीने में 'टाइम करेक्शन' के आसार को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का मानना है कि हाई वैल्यूएशंस और डोमेस्टिक इनफ्लो की वजह से अगले 3-6 महीनों में 'प्राइस करेक्शन' की संभावना नहीं है। हालांकि, माहौल ज्यादा अनुकूल नहीं होने के कारण तेजी की संभावना भी सीमित होगी।
गोल्डमैन सैक्स का यह भी कहना है कि बेशक भारतीय शेयरों का ढांचागत आकर्षण बरकरार है, लेकिन इकोनॉमिक ग्रोथ और प्रॉफिट में सुस्ती दिख रही है। तकरीबन सभी विश्लेषकों ने अर्निंग ग्रोथ में सुस्ती पर भी चिंता जताई है, क्योंकि कंपनियों को हाई बेस, लड़खड़ाती मांग और घटते मार्जिन की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज, नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज और एक्सिस सिक्योरिटीज जैसी ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि दूसरी तिमाही की अर्निंग ग्रोथ कोविड के बाद के निचले स्तर पर पहुंच सकती है।
इसके अलावा, जुलाई-सितंबर अवधि में प्रॉफिट ग्रोथ घटकर 2 पर्सेंट के आसपास रहने का अनुमान है। यह पिछली 17 तिमाहियों के लिहाज से निफ्टी कंपनियों के लिए सबसे सुस्त अर्निंग ग्रोथ हो सकती है। अर्निंग ग्रोथ में यह जबरदस्त बदलाव इंडिया इंक द्वारा 4 साल की शानदार डबल डिजिट ग्रोथ के बाद देखने को मिला है। अनुमान है कि आने वाले समय में अर्निंग ग्रोथ संबंधी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
गोल्डमैन सैक्स ने इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निफ्टी के लिए 12 महीने का टारगेट घटाकर 27,000 कर दिया है, जो 9 पर्सेंट की बढ़ोतरी की तरफ इशारा करता है। हालांकि, यह गोल्डमैन सैक्स के पिछले अनुमान 27,500 से कम है। गोल्डमैन सैक्स को शॉर्ट टर्म में निफ्टी सूचकांक गिरकर 24,500 तक पहुंच जाने और उसके बाद अगले 6 महीनों में बढ़कर 25,500 तक पहुंच जाने का अनुमान है।
सेक्टर आउटलुक के लिहाज से गोल्डमैन सैक्स की ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम और इंश्योरेंस को लेकर ओवरवेट रेटिंग बरकरार है, जबकि रियल्टी और इंटरनेट सेक्टरों को भी अपग्रेड कर 'ओवरवेट' कर दिया गया है। साथ ही, इसने इंडस्ट्रियल्स, सीमेंट, केमिकल्स और फाइनेंशियल्स जैसे सेक्टरों को डाउनग्रेड कर दिया है।