Nifty Target: दिग्गज ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs का मानना है कि अगले 12 महीनों में निफ्टी 26,500 तक पहुंच सकता है। मौजूदा स्तर से इसमें करीब 12% की तेजी की गुंजाइश है। बेहतर इकोनॉमिक ग्रोथ और कंपनियों की कमाई में सुधार से बाजार को सपोर्ट मिल सकता है।
इकोनॉमी में रिकवरी का असर
Goldman Sachs के ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट सुनील कौल ने कहा कि भारत ने हाल में दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है। इसके बावजूद 26,500 का टारगेट बरकरार है।
कौल का कहना है कि अगले 12 महीनों में बाजार फिर अपने पुराने हाई के करीब जा सकता है। Goldman Sachs को भारतीय कंपनियों की कमाई में 12-13% ग्रोथ की उम्मीद है। कौल के मुताबिक इकोनॉमी में रिकवरी अब धीरे-धीरे ज्यादा क्षेत्रों में दिख रही है।
विदेशी निवेशकों का रुख बदला
भारत को लेकर विदेशी निवेशकों का मूड भी सुधरा है। जुलाई और अगस्त में भारत में करीब 2-3 अरब डॉलर का नेट इक्विटी इनफ्लो आया।
इससे पहले विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर AI की तेजी वाले दूसरे एशियाई और इमर्जिंग मार्केट्स में लगा रहे थे। हालांकि, अभी भी विदेशी निवेशक भारत में अंडरवेट हैं। ऐसे में सेंटीमेंट सुधरने पर भारत में और पैसा आ सकता है।
फाइनेंशियल पर सबसे ज्यादा भरोसा
सुनील कौल को सबसे ज्यादा भरोसा फाइनेंशियल सेक्टर पर है। बैंकों में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत है। नॉमिनल ग्रोथ में भी सुधार हो रहा है।
FCNR इनफ्लो के बाद बैंकों के लिए फंडिंग की स्थिति भी बेहतर हुई है। Goldman Sachs को अगले 3-5 साल में करीब 14% लोन ग्रोथ की उम्मीद है। प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट में करीब 17% ग्रोथ का अनुमान है।
रिफाइनर्स और होटल्स भी पसंद
फाइनेंशियल के बाद कौल को रिफाइनर्स पसंद हैं। प्रोडक्ट मार्केट में सप्लाई कम रहने से इनकी कमाई को फायदा मिल सकता है।
होटल और टूरिज्म सेक्टर पर भी उनका भरोसा है। डिफेंस और यूटिलिटी कंपनियों में भी उन्हें मीडियम टर्म में अच्छे मौके दिख रहे हैं।
IT सर्विसेज पर Goldman Sachs अभी अंडरवेट है। हाल में IT शेयरों में रिकवरी जरूर आई है। लेकिन कौल के मुताबिक कंपनियों की कमाई पर अभी दबाव है।
वैल्यूएशन भी ज्यादा हैं। उनका मानना है कि हाल की तेजी में शॉर्ट-कवरिंग की बड़ी भूमिका रही है। इसलिए इसे फंडामेंटल में बड़े सुधार का संकेत नहीं माना जा सकता।
Auto और Consumption पर क्या राय?
कंजम्पशन सेक्टर में कौल को चुनिंदा स्टेपल कंपनियां पसंद हैं। टूरिज्म भी उनकी पसंद में है। उनका झुकाव शहरी मांग से जुड़े कारोबार की तरफ है।
दूसरी ओर, ऑटो सेक्टर को लेकर वह सतर्क हैं। इसकी वजह बड़ा GST बेस ओवरहैंग है।
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