सरकार ने विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत दी है। अब सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करने वाले फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स को टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा। नया नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो चुका है। सरकार ने गवर्नमेंट बॉन्ड्स में फॉरेन इनवेस्टमेंट अट्रैक्ट करने के लिए यह कदम उठाया है। इससे पहले सरकार के बॉन्ड्स में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को इंटरेस्ट इनकम के साथ ही कैपिटल गेंस पर टैक्स चुकाना पड़ता था। इससे निवेश पर उनका रिटर्न घट जाता था। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करने पर विदेशी निवेशकों पर इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत कैसे टैक्स लगता था?
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत कुछ खास सरकारी सिक्योरिटीज के इंटरेस्ट पर FIIs को टैक्स से छूट मिलती थी। यह छूट सेक्शन 10(15) के तहत 2002 तक मिलती थी। उसके बाद 2013 से 2023 के बीच टैक्स की 5 फीसदी रियायती दर लागू कर दी गई। इस छूट के दायरे में नहीं आने वाले सरकारी सिक्योरिटीज के इंटरेस्ट और कैपिटल गेंस पर विदेशी निवेशकों को टैक्स चुकाना पड़ता है।
विदेशी निवेशकों पर इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत किस तरह टैक्स लगेगा?
इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 210 के तहत सिक्योरिटीज से इंटरेस्ट इनकम और कैपिटल गेंस पर टैक्स के लिए खास प्रावधान शामिल किए गए हैं।
फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर (FII) की परिभाषा क्या है?
इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 210(6)(a) के तहत 'फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर' का मतलब ऐसे इनवेस्टर से है, जिसकी परिभाषा केंद्र सरकार नोटिफिकेशन के जरिए कर सकती है। ऐसे निवेशकों में ऐसे फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) आते हैं, जो सेबी के पास रजिस्टर्ड हैं।
इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत FIIs को कितना टैक्स चुकाना पड़ता है?
इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 210(1) के तहत सिक्योरिटीज से होने वाली इनकम पर 20 फीसदी टैक्स लगता है। सेक्शन 196 के दायरे में नहीं आने वाले शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस पर 30 फीसदी टैक्स लगता है, जबकि सेक्शन 196 के दायरे में आने वाले शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस पर 20 फीसदी टैक्स लगता है। सेक्शन 198 के दायरे में नहीं आने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 12.5 फीसदी टैक्स लगता है। सेक्शन 198 के तहत आने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस 1,25,000 रुपये से ज्यादा होने पर 12.5 फीसदी टैक्स लगता है।
सरकार ने जो अध्यादेश पेश किया है उसमें FIIs पर टैक्स के नियम में क्या बदलाव किए गए हैं?
इसमें मुख्य रूप से दो बदलाव हैं। पहला, सरकारी सिक्योरिटीज से इंटरेस्ट इनकम पर कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा। दूसरा, सरकारी सिक्योरिटीज के रिडेम्प्शन या ट्रांसफर पर हुए कैपिटल गेंस पर भी कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा।