सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) में हिस्सेदारी बेचकर इस साल अब तक करीब ₹25,491 करोड़ जुटा लिए हैं। साल 2015 के बाद यह OFS (ऑफर फॉर सेल) के जरिए जुटाई गई सबसे बड़ी रकम है। अब सरकार LIC में हिस्सेदारी बेचकर इसमें करीब ₹31,000 करोड़ और जोड़ सकती है।
LIC का OFS मंगलवार को गैर-रिटेल निवेशकों के लिए खुला। सरकार इसमें 6.5% तक हिस्सेदारी बेच रही है। इसमें 4% का ग्रीनशू ऑप्शन भी शामिल है। फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर रखा गया है। रिपोर्ट लिखे जाने तक यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो चुका था।
किस PSU ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया?
इस साल OFS के बाद BHEL सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला PSU शेयर रहा। इसका शेयर OFS फ्लोर प्राइस से करीब 62% ऊपर कारोबार कर रहा है।
वहीं, Coal India और NHPC करीब 9% ऊपर हैं। Central Bank of India करीब 6% और GIC करीब 4% की बढ़त पर हैं। NLC India लगभग 1% ऊपर है। वहीं, IRFC अपने फरवरी OFS फ्लोर प्राइस से करीब 3% नीचे कारोबार कर रहा है।
सरकार के हिस्सेदारी बिक्री का हिसाब
नोट : ये सभी आंकड़े मंगलवार, 4 अगस्त के मार्केट बंद होने तक के समय के हैं।
सरकार का कहना है कि हिस्सेदारी बिक्री का मकसद विनिवेश यानी सरकारी खजाने के लिए पैसे जुटाना है। साथ ही, कुछ मामले में मिमिनम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों का पालन करना है। इस नियम के तहत किसी भी कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी 75% से अधिक नहीं हो सकती। अगर ऐसा है, तो तय समय के भीतर हिस्सेदारी बेचकर कम करनी होगी।
LIC का ऑफर फॉर सेल (OFS) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो इस साल का सबसे बड़ा PSU OFS माना जा रहा है। इसमें सरकार की हिस्सेदारी 90% के करीब है। इसका मतलब है कि अभी सरकार को और हिस्सेदारी बेचनी पड़ेगी।
मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार ने करीब ₹80,000 करोड़ के डिसइन्वेस्टमेंट का लक्ष्य रखा है। हालांकि, कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि LIC के पास MPS नियम पूरा करने के लिए अभी करीब 10 महीने का समय था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सरकार यह OFS अभी क्यों लाई।
मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बालिगा के मुताबिक, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हिस्सेदारी बिक्री से मिलने वाला पैसा सरकार कहां खर्च करती है। अंबरीश का कहना है कि इस पैसे के तेल सब्सिडी के बोझ को संभालने में या फिर कैपेक्स (पूंजीगत खर्च) बढ़ाने में लगने के ज्यादा आसार हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।