मार्केट में तेज उठा-पटक और जियोपॉलिटिकल टेंशन के बावजूद मार्केट में आने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में लगातार दूसरे महीने डिस्काउंट ब्रोकरेजेज के एक्टिव क्लाइंट्स बढ़े। पिछले महीने फरवरी में एनएसई पर एक्टिव इंवेस्टर्स की संख्या 3.56 लाख बढ़ी जोकि जनवरी में 3 लाख की बढ़ोतरी से अधिक रही। इसमें भी बाजी एक्टिव इंवेस्टर्स के हिसाब से देश के सबसे बड़े ब्रोकर ग्रो (Groww) ने मारी और करीब 75% बढ़ोतरी इसी के जरिए हुई। एनएसई के मुताबिक 12 महीने में कम से कम एक बार ट्रेड लेने वाले एक्टिव इंवेस्टर्स हैं।
Groww ने मारी बाजी, Zerodha और Angel One सुस्त
पिछले महीने एनएसई पर 3.56 लाख एक्टिव इंवेस्टर्स बढ़े जिसमें से करीब 2.66 लाख एक्टिव क्लाइंट्स तो एक्टिव इंवेस्टर्स के लिहाज से देश के सबसे बड़े ब्रोकर ग्रो ने जोड़े। इस प्रकार डिस्काउंट ब्रोकरेजेज में करीब 75% क्लाइंट्स ग्रो ने जोड़े। जनवरी में भी ग्रो ने 3.5 लाख एक्टिव इंवेस्टर्स जोड़े थे जबकि सभी डिस्काउंट ब्रोकरेजेज ने कुल मिलाकर करीब 3 लाख एक्टिव इंवेस्टर्स ही जोड़े थे। बाकी ब्रोकरेजेज के एक्टिव क्लाइंट्स में बढ़ोतरी की रफ्तार सुस्त रही। रेवेन्यू के हिसाब से देश के सबसे बड़े ब्रोकर जीरोधा और एंजेल वन ने फरवरी में करीब 10-10 हजार एक्टिव इंवेस्टर जोड़े। फुल-सर्विस ब्रोकर्स में बात करें तो आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने करीब 29,830 इंवेस्टर्स फरवरी में जोड़े।
वहीं दूसरी तरफ अपस्टॉक्स का एक्टिव क्लाइंट बेस करीब 27,535 तो एचडीएफसी सिक्योरिटीज का करीब 14,276 क्लाइंट्स घट गया। मोतीलाल ओसवाल, आईआईएफएल कैपिटल, 5पैसा कैपिटल, मिरे एसेट कैपिटल, च्वाइस इक्विटी और फोनपे वेल्थ ब्रोकिंग के भी एक्टिव क्लाइंट्स कम हुए हैं तो कोटक सिक्योरिटीज, एसबीआई सिक्योरिटीज, रेज सिक्योरिटीज (पूर्व नाम मनीलिसियस सिक्योरिटीज), पेटीएम मनी, इंडस्टॉक्स और एक्सिस सिक्योरिटीज के एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या फरवरी महीने में बढ़ी।
पिछले साल 2025 में ब्रोकरेजेज फर्मों को लगा था झटका
फरवरी महीने में एक्टिव इंवेस्टर्स की संख्या बढ़ी है लेकिन पिछले साल 2025 के आंकड़ों की बात करें तो कुछ ब्रोकरेजेज फर्म को झटका लगा था। जीरोधा का एक्टिव इंवेस्टर बेस करीब 11 लाख घट गया था तो एंजेल वन का करीब 10 लाख। हालांकि साल 2024 में टॉप ब्रोकिंग फर्म्स ने मिलकर करीब 1 करोड़ नए एक्टिव इंवेस्टर्स जोड़े थे और पिछले साल 2025 में जो गिरावट आई थी, वह उनके ओवरऑल बेस की तुलना में छोटा-सा ही हिस्सा रहा। बाजार के जानकारों के मुताबिक सख्त नियमों के चलते एक्टिव क्लाइंट ग्रोथ सुस्त हुई है। मार्जिन की सख्त जरूरतों, वीकली एक्सपायरी में कटौती, अधिक पूंजी की जरूरत, और टैक्स में बढ़ोतरी ने खुदरा निवेशकों के लिए डेरिवेटिव्स का आकर्षण कम कर दिया।