क्या आपको निवेश पर इनफ्लेशन से ज्यादा रिटर्न मिल रहा है? खुद से जरूर पूछें यह सवाल

इनफ्लेशन आपके पैसे की वैल्यू को कम करता है। अगर आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न इनफ्लेशन के रेट से कम है तो आप जान लीजिए कि आपका पैसा बढ़ने की जगह घट रहा है। इसका पता आम तौर पर आपको नहीं चलता है। लेकिन, लंबी अवधि में इससे काफी फर्क पड़ता है

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 6:09 PM
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कई लोग बैंक में पैसा रखना सबसे सुरक्षित मानते हैं। लेकिन, पैसे की सुरक्षा और उसकी ग्रोथ दोनों अलग-अलग चीजें हैं।

आपने ध्यान दिया है कि 8-10 साल पहले आपके परिवार का ग्रॉसरी का मासिक खर्च आज के मुकाबले कितना था? अगर आप याद करेंगे तो पाएंगे कि यह दोगुना से ज्यादा हो गया है। रोजमर्रा की हर चीज की कीमत समय के साथ बढ़ती है। इसमें बिजली बिल, फल और सब्जियां, खाने का तेल, अनाज, कॉस्मेटिक्स सहित सबकुछ शामिल है। सेवाओं की कीमतें भी इसी तरह से बढ़ती हैं। इसमें ड्राईक्लिनिंग चार्ज, व्हीकल सर्विस चार्ज, डॉक्टर की फीस, मेड की सैलरी आदि शामिल हैं। इसकी वजह इनफ्लेशन है।

इनफ्लेशन आपके पैसे की वैल्यू को कम करता है। अगर आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न इनफ्लेशन के रेट से कम है तो आप जान लीजिए कि आपका पैसा बढ़ने की जगह घट रहा है। इसका पता आम तौर पर आपको नहीं चलता है। लेकिन, लंबी अवधि में इससे काफी फर्क पड़ता है। अगर आप चाहते हैं कि आपके पैसे की वैल्यू घटने की जगह बढ़नी चाहिए तो आपको खुद से एक सवाल पूछना होगा। सवाल है-क्या आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न इनफ्लेशन के रेट से ज्यादा है?

कई लोग बैंक में पैसा रखना सबसे सुरक्षित मानते हैं। लेकिन, पैसे की सुरक्षा और उसकी ग्रोथ दोनों अलग-अलग चीजें हैं। ज्यादातर बैंकों के सेविंग्स अकाउंट का इंटरेस्ट रेट 3-4 फीसदी है। अगर इनफ्लेशन 6 फीसदी है तो इसका मतलब है कि आपके पैसे की वैल्यू बढ़ने की जगह घट रही है। आपको तुरंत इसका पता नहीं चलता है।


बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट की स्थिति भी अलग नहीं है। अगर किसी एफडी पर आपको 7 फीसदी इंटरेस्ट मिलता है। और इनफ्लेशन का रेट 6 फीसदी है तो टैक्स के असर को एडजस्ट करने के बाद आपका रियल रिटर्न निगेटिव आएगा। अगर आप ज्यादा टैक्स वाले स्लैब में आते हैं तो आपका रियल रिटर्न और कम हो जाएगा। इसलिए बैंक एफडी में निवेश करने से पहले आपको इस पहलू पर विचार करना जरूरी है।

अगर आप फिस्क्ड इनकम वाले विकल्पों में निवेश करना चाहते हैं तो आपको उन स्कीमों में निवेश करना चाहिए, जिनमें मैच्योरिटी अमाउंट टैक्स-फ्री होता है। पीपीएफ इसका उदाहरण है। यह ऐसा इनवेस्टमेंट विकल्प है जो EEE के तहत आता है। इसका मतलब है कि इसमें निवेश के अमाउंट, इंटरेस्ट और मैच्योरिटी अमाउंट में से किसी पर टैक्स नहीं लगता है। इस वजह से रिटर्न टैक्स की वजह से कम नहीं होता है। दूसरा, लंबी अवधि का निवेश होने के चलते इस पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। इससे लंबी अवधि में अच्छा फंड तैयार हो जाता है।

म्यूचुअल फंड की स्कीम का रिटर्न लंबी अवधि में अट्रैक्टिव होता है। आम तौर पर सालाना 12 फीसदी का रिटर्न मिल जाता है। यह इनफ्लेशन के रेट से काफी ज्यादा है। इस वजह से टैक्स को एडजस्ट करने के बाद भी आपका रियल रिटर्न इनफ्लेशन के रेट से काफी ज्यादा होता है। लंबी अवधि में औसत 12 फीसदी के रिटर्न के साथ आसानी से बड़ा फंड तैयार हो जाता है। इसकी वजह यह है कि आपको कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है।

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