जीरोधा, ग्रो, एंजल वन और अपस्टॉक्स को अमेरिकी सहित विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सुविधा देने की इजाजत मिल गई है। ये ब्रोकरेज फर्में गिफ्टी सिटी के जरिए विदेशी स्टॉक्स में इनवेस्टमेंट की सुविधा देंगी। इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (आईएफएससीए) से यह जानकारी मिली है। अमेरिका सहित कई देशों के स्टॉक एक्सचेंजों में बीते एक-दो सालों में अच्छी तेजी आई है। हाल में स्पेसएक्स के आईपीओ के बाद अमेरिकी बाजारों में हलचल बढ़ी है। इस साल के अंत तक एंथ्रॉपिक और ओपनएअआई के आईपीओ भी आने की उम्मीद है।
2-3 महीनों में कंप्लायंस पूरा होने की उम्मीद
धन (Dhan) नाम से ब्रोकरेज सर्विस देने वाली रेन सिक्योरिटीज ने भी पिछले हफ्ते से अमेरिकी कंपनियों के शेयर लॉन्च कर दिए। IFSCA एक अथॉरिटी है, जिस पर गिफ्ट सिटी में फाइनेंशियल प्रोडेक्ट्स, सर्विसेज और इंस्टीट्यूशंस के डेवलपमेंट और रेगुलेशंस की जिम्मेदारी है। सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि जीरोधा, ग्रो, एंजल वन और अपस्टॉक्स दो से तीन महीनों में टेक्नोलॉजी, टेस्टिंग और कंप्लायंस पूरा कर लेंगे।
अगस्त में शुरू हुआ था गैप रजिस्ट्रेशन
Gift City ने अगस्त में ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) रजिस्ट्रेशन शुरू किया था। इसका मकसद इनवेस्टर्स को कम कॉस्ट में विदेशी स्टॉक्स में निवेश की सुविधा देना है। पैसे निकालने पर इनवेस्टर्स को किसी तरह की विड्रॉल कॉस्ट देने की जरूरत नहीं पड़ती है। जीरोधा और अपस्टॉक्स ब्रोकर-डीलर की तरह काम करेंगे, जबकि ग्रो और एंजल वन ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) के रूप में काम करेंगे।
ये कंपनियां यूएस स्टॉक्स में दे रही निवेश की सुविधा
जीरोधा और अपस्टॉक्स व्यू ट्रेड इंटरनेशनल, एंटरएक्टिव ब्रोकर्स और अल्पाका सिक्योरिटीज जैसे विदेशी क्लियरिंग फर्मों के जरिए ट्रेड्स रूट करेंगे। सिर्फ व्यूट्रेड के पास GAP का एप्रूवल है, जबकि एंटरएक्टिव ब्रोकर्स और अल्पाका को अपने प्रोडक्ट्स लॉन्च करने में समय लगेगा। एआई बूम के बाद स्मॉलकेस, इंडमनी और एचडीएफसी सिक्योरिटीज जैसी फर्मों ने अमेरिकी स्टॉक्स में निवेश की सुविधा शुरू की थी, जिसके बाद वॉल्यूम में बड़ी ग्रोथ दिखी।
10 लाख से ज्यादा के निवेश पर टीसीएस कटेगा
10 लाख रुपये से ज्यादा के निवेश पर 20 फीसदी टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) लागू होगा। इसे इनवेस्टर्स की कुल टैक्स लायबिलिटी के साथ एडजस्ट किया जा सकेगा। 24 महीने से पहले शेयरों को बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लागू होगा। गेस पर इनवेस्टर्स के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। 24 महीनों के बाद स्टॉक्स बेचने पर 12.5 फीसदी का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लागू होगा।
एआई, सेमीडंकक्टर जैसे थीम पर दांव लगाना चाहते हैं इनवेस्टर्स
भारत में निवेशकों की दिलचस्पी विदेशी कंपनियों के शेयरों में बढ़ रही है। इसकी वजह यह है कि इससे निवेशकों को AI, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसी थीम पर दांव लगाने का मौका मिलता है। इस वजह से अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में बड़ी तेजी देखने को मिली है। बीते एक साल में इन बाजारों का रिटर्न भारतीय शेयर बाजार के मुकाबले काफी ज्यादा रहा है।