Gujarat Gas Shares: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध का असर अब भारतीय ऊर्जा कंपनियों पर भी दिखाई देने लगा है। गुजरात गैस लिमिटेड के शेयर गुरुवार 5 मार्च को शुरुआती कारोबार में 6 प्रतिशत से अधिक गिर गए। कंपनी की ओर से इंडस्ट्रियल ग्राहकों को गैस सप्लाई में कटौती की पुष्टि के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई।
सुबह करीब 9:30 बजे गुजरात गैस का शेयर लगभग 6.1 प्रतिशत गिरकर 392 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। इस गिरावट के साथ ही शेयर ने पिछले सेशन में दिख पूरी तेजी को गंवा दिया।
इंडस्ट्रियल ग्राहकों को गैस सप्लाई में कटौती
कंपनी ने अपने गैस सप्लाई एग्रीमेंट के तहत ‘फोर्स मेजर’ प्रावधान लागू कर दिया है। इसका मतलब यह है कि असाधारण परिस्थितियों में सप्लायर बिना किसी दंड के सप्लाई रोक या कम कर सकता है।
गुजरात गैस ने कहा कि युद्ध जैसी स्थिति उसकी बीमा पॉलिसी के दायरे में नहीं आती। कंपनी के मुताबिक ईरान-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के वास्तविक असर का अभी स्पष्ट रूप से आकलन करना मुश्किल है।
इसी बीच कतर एनर्जी ने भी प्रभावित खरीदारों के लिए फोर्स मेजर लागू कर दिया है। कंपनी ने पहले अपने उत्पाद की सप्लाई रोकने की घोषणा की थी और अब औपचारिक रूप से खरीदारों को सूचित किया है कि उसके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण वह सप्लाई से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में असमर्थ हो सकती है।
कतर भारत के लिए LNG का प्रमुख स्रोत है। भारत अपनी कुल LNG आयात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा कतर से खरीदता है। ऐसे में वहां से सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा का असर घरेलू गैस बाजार पर पड़ सकता है।
उद्योगों पर भी पड़ सकता है असर
विश्लेषकों का मानना है कि गैस सप्लाई में कटौती का असर उन उद्योगों पर पड़ सकता है जो बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल करते हैं। अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा खिंचता है और गैस सप्लाई प्रभावित रहती है, तो इससे उत्पादन लागत और एनर्जी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
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