एचडीएफसी बैंक ने एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज के आईपीओ के लिए प्रोसेस शुरू कर दिया है। एचडीबी फाइनेंशियल बड़ी एनबीएफसी की कैटेगरी में आती है। आरबीआई के नियमों के मुताबिक, इस कैटेगरी की एनबीएफसी के लिए सितंबर 2025 तक खुद को लिस्ट कराना जरूरी है। एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ने पिछले हफ्ते एचडीबी फाइनेंशियल के 2,500 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस आईपीओ में ऑफर फॉर सेल भी शामिल होगा, जिसमें एनबीएफसी के निवेशक अपने शेयर बेचेंगे।
HDFC Bank की 94 फीसदी हिस्सेदारी
HDB Financial में एचडीएफसी बैंक की 94.6 फीसदी हिस्सेदारी है। इसका मतलब है कि एचडीबी की लिस्टिंग का असर HDFC Bank की वैल्यूएशन पर पड़ेगा। एचडीबी के अनलिस्टेड शेयरों में ओवर द काउंटर मार्केट (OTC) में प्रति शेयर 1,375-1,450 रुपये के बीच ट्रेडिंग हो रही है। इस हिसाब से एचडीबी की वैल्यूएशन FY26 (प्री-मनी) की अनुमानित बुक वैल्यू की 5.3-5.6 गुनी है। इस आधार पर इस एनबीएफसी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1,08,800-1,14,000 करोड़ रुपये के बीच होगा।
2007 में एचडीएफसी बैंक ने की थी शुरुआत
एचडीबी की यह अनुमानित वैल्यूएशन किसी एनबीएफसी के लिए काफी अच्छी वैल्यूएशन कही जाएगी। सवाल है कि क्या इस प्रीमियम वैल्यूएशन को सही कहा जा सकता है? दूसरा यह कि एचडीएबी का कितना असर एचडीएफसी बैंक के शेयरों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है? एचडीएफसी बैंक ने 2007 में एचडीबी की शुरुआत एक एनबीएफसी के रूप में की थी। पिछले सालों में एचडीबी रिटेल लोन मार्केट की सबसे बड़ी फाइनेंस कंपनियों में अपनी जगह बनाने में सफल रही है। इस साल जून के अंत में देश में 1,154 जगहों पर इसकी 1,727 ब्रांच थीं।
90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा एयूएम
HDB Financial का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) FY24 के अंत में 90,000 करोड़ रुपये था। बीते दो साल में इसकी ग्रोथ (CAGR) 21 फीसदी रही है। इस साल जून के अंत में एयूएम बढ़कर 95,600 करोड़ रुपये हो गया था। यह साल दर साल आधार पर 30 फीसदी ग्रोथ है। कंपनी का प्रोडक्ट बेस काफी डायवर्सिफायड है। इसमें कमर्शियल व्हीकल/कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट फाइनेंसिंग शामिल हैं। इसके एयूएम में इसकी ज्यादा हिस्सेदारी है। अब कंपनी कंज्यूमर ड्यूरेबल फाइनेंसिंग, गोल्ड लोन, डिजिटल प्रोडक्ट्स लोन सहित कुछ अन्य सेगमेंट में विस्तार कर रही है। इसके एयूएम में इन सेगमेंट की हिस्सेदारी बढ़कर 8 फीसदी हो गई है।
एचडीएफसी बैंक के सपोर्ट का फायदा
FY24 में एचडीबी का रिटर्न ऑन एसेट (RoA) बढ़कर 3 फीसदी और रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) बढ़कर 19.5 फीसदी पर पहुंच गया। इसमें कंपनी की क्रेडिट की कम कॉस्ट का हाथ है। लेकिन, एचडीबी की वैल्यूएशन ज्यादा है, जिसकी वजह एचडीएफसी बैंक का सपोर्ट है। इससे यह सस्ते रेट पर फंड जुटाती है। इसके अलावा एचडीएफसी ग्रुप की कई सहयोगी कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। इनमें गृह फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ और एचडीएफसी लाइफ शामिल हैं। इसलिए एचडीएबी की हाई वैल्यूएशन की वजह समझी जा सकती है।
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1,40,000 करोड़ हो सकती है वैल्यूएशन
Bajaj Housing हाल में लिस्ट हुई है। इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 1,36,000 करोड़ है। इस वैल्यूएशन पर यह एचडीबी फाइनेंशियल के मुकाबले महंगी है। यह भी ध्यान में रखना जरूरी है कि बजाज हाउसिंग हाउसिंग फाइनेंस बिजनेस में है, जिसमें प्रतिस्पर्धा काफी ज्यादा है और मार्जिन काफी कम है। ऐसे में RoA बढ़ने की गुंजाइश सीमित है। दूसरी तरफ एचडीबी की प्रोडक्ट लाइन काफी डायवर्सिफायड है। सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाली एनबीएफसी होने के नाते एचडीबी की लिस्टिंग प्रति शेयर 1,700 रुपये से ज्यादा प्राइस पर हो सकती है। ऐसे में इसकी वैल्यूएशन 1,40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा होगी।