बॉम्बे हाईकोर्ट से एचडीएफसी बैंक के सीईओ शशिधर जगदीशन को बड़ी राहत, 2 करोड़ घूस मामले में FIR रद्द

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एमएस कार्णिक और जस्टिस एनआर बोरकर की बेंच ने 5 मई को जगदीशन को राहत दी। बेंच ने यह कहते हुए इस मामले में दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया कि जगदीशन के खिलाफ की गई शिकायत सही (non-bona fide) नहीं थी

अपडेटेड May 05, 2026 पर 6:37 PM
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यह एफआईआर शशिधर जगदीशन के खिलाफ घूस की शिकायत से जुड़े एक मामले में दर्ज हुई थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 5 मई को एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया। यह एफआईआर घूस की शिकायत से जुड़े एक मामले में दर्ज की गई थी। यह शिकायत लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की तरफ से की गई थी। यह ट्रस्ट मुंबई के मशहूर लीलावती हॉस्पिटल को चलाता है।

हाईकोर्ट ने 5 मई को जगदीशन की याचिका पर सुनाया फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने 5 मई को जगदीशन की याचिका पर फैसला सुनाया। एचडीएफसी बैंक के एमडी ने याचिका दाखिल कर एफआईआर निरस्त करने और 29 मई के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आर्डर को रद्द करने की मांग की थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस को जगदीशन के खिलाफ आई शिकायत की जांच करने का आदेश दिया था।


लीलावती मेडिकल ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज हुई थी FIR

जस्टिस एमएस कार्णिक और जस्टिस एनआर बोरकर की बेंच ने 5 मई को जगदीशन को राहत दे दी। बेंच ने यह कहते हुए इस मामले में दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया कि जगदीशन के खिलाफ की गई शिकायत सही (non-bona fide) नहीं थी। यह FIR लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज की गई थी।

जगदीशन पर 2 करोड़ रुपये घूस लेने का आरोप था

ट्रस्ट ने अपनी शिकायत में कहा था कि जगदीशन ने एक खास समूह की मदद करने के एवज में 2.05 करोड़ रुपये की घूस ली थी। इस समूह में चेतना महेता और दूसरे पूर्व ट्रस्टीज शामिल थे, जो कथित रूप से उस ट्रस्ट पर अवैध नियंत्रण बनाए रखना चाहते थे, जो लीलावती हॉस्पिटल को चलाती है। कोर्ट ने कहा, "हमारी नजर में यह शिकायत शुरू की गई रिकवरी प्रोसिडिंग्स का सिर्फ एक जवाब था।"

कोर्ट कहा कि साक्ष्यों से आरोप की पुष्टि नहीं होती

कोर्ट ने यह भी कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से शिकायत में लगाए आरोपों की पुष्टि नहीं होती। कोर्ट ने शिकायतकर्ता के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि ट्रस्ट के फाउंडर किशोर मेहता का 2024 में देहांत हो गया था, जिसकी वजह बैंक की तरफ से बढ़ा गया दबाव था। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए बैंक के अधिकारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

बैंक के लोन की रिकवरी से जुड़ा था यह मामला

यह मामला एचडीएफसी बैंक की रिकवरी की प्रक्रिया से जुड़ा है। स्पलेंडर जेम्स ने बैंक से लोन लिया था। लोन का कुल 65.22 करोड़ रुपये बकाया पैसा नहीं चुकाने पर बैंक ने रिकवरी की प्रकिया शुरू की थी।स्पलेंडर जेम्स का मालिकाना हक और प्रबंधन मेहता फैमिली के पास थी।

ट्रस्ट ने एक डायरी के आधार पर घूस लेने का दावा किया था

ट्रस्ट ने आरोप लगाया था कि रिकवरी प्रोसेस में एक कंपनी से जुड़ी एक डायरी मिली थी, जिसमें जगदीशन को 2.05 करोड़ रुपये घूस देने का संकेत था। यह कंपनी ट्रस्ट के एक ट्रस्टी से जुड़ी थी। आरोप में यह भी कहा गया था कि यह घूस चेतन मेहता के इशारे पर दी गई।

5 मई को एचडीएफसी बैंक के शेयर में गिरावट 

एचडीएफसी बैंक का शेयर 5 मई को 0.80 फीसदी गिरकर 773 रुपये पर बंद हुआ। बैंक के शेयरों पर एफआईआर रद्द होने का असर 5 मई को दिख सकता है। बैंक के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है।

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