एचडीएफसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ शशिधर जगदीशन ने कहा है कि उन्हें एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी के विलय के फैसले का कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने बैंक की अनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) में यह बात कही। एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने भी विलय के बारे में अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विलय से न सिर्फ बैंक के लिए भविष्य में ग्रोथ का रास्ता बना है बल्कि यह एक बड़ा फाइनेंशियल सर्विसेज इंस्टीट्यूशन बना है।
विलय के बाद बढ़ी है एचडीएफसी बैंक की क्षमता
चक्रवर्ती ने कहा कि HDFC का इंटिग्रेशन सफल रहने से एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) की कैपेसिटी काफी बढ़ी है। इससे यह ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दे रहा है और नए ग्राहकों को अट्रैक्ट कर रहा है। उन्होंने इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए मॉनेटरी पॉलिसी के स्तर पर उठाए गए कदमों से पड़ने वाले असर के बारे में भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने आश्वस्त किया कि इसके पड़ने वाले आर्थिक असर को लेकर एचडीएफसी बैंक सावधानी बरत रहा है।
2022 में हुआ था एचडीएफसी के विलय का फैसला
एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी के विलय का ऐलान 4 अप्रैल, 2022 को हुआ था। इसे इंडिया में कंपनियों के इतिहास में सबसे बड़ा ट्रांजेक्शन माना गया था। 40 अरब डॉलर की यह डील पूरी तरह से शेयरों की अदलाबदली से हुई थी। इस डील के जरिए एचडीएफसी बैंक ने अपनी पेरेंट कंपनी का अधिग्रहण किया था। विलय के बाद एचडीएफसी बैंक का कंबाइंड एसेट 18 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। विलय से पहले एचडीएफसी इंडिया की सबसे बड़ी होम लोन कंपनी थी।
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एचडीएफसी बैंक के शेयरों का कमजोर प्रदर्शन
HDFC Bank के शेयर 9 अगस्त को 0.44 फीसदी उछाल के साथ 1,650 रुपये पर बंद हुए थे। इस साल बैंक के शेयर का रिटर्न निगेटिव रहा है। बीते एक साल में इसने सिर्फ 0.86 फीसदी रिटर्न दिया है। इसके मुकाबले, इस साल सेंसेक्स ने 10.29 फीसदी रिटर्न दिया है। बीते एक साल में सेंसेक्स का रिटर्न 21.34 फीसदी रहा है।