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HDFC Bank Share Price : 45 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान में गड़बडी पर आई खबर के बाद 2% टूटा शेयर

HDFC Bank Share Price : एक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद HDFC Bank का शेयर 2% गिरा है। बैंक की आंतरिक जांच में 45 करोड़ रुपये के'डिफरेंशियल इंटरेस्ट'पेमेंट्स का पता चला है। बता दें कि बैंक के पूर्व चेयरमैन ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि बैंक के तौर-तरीके उनके मूल्यों से मेल नहीं खाते

MoneyControl Newsअपडेटेड May 27, 2026 पर 12:07 PM
HDFC Bank Share Price : 45 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान में गड़बडी पर आई खबर के बाद 2% टूटा शेयर
HDFC Bank news : आरोप है कि ये भुगतान MSRDC की जमा राशि पर अलग-अलग ब्याज के रूप में किए गए थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ब्याज भुगतान के तौर पर सीधे जमा किए जाने के बजाय इस पैसे को मार्केटिंग विभाग के ज़रिए भेजा गया

HDFC Bank Share Price : आज बुधवार के कारोबारी सत्र में HDFC बैंक के शेयर लगभग 2 प्रतिशत गिर गए हैं। यह गिरावट 'इंडियन एक्सप्रेस'की उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें बताया गया है कि बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को किए गए 45 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान को लेकर एक आंतरिक सतर्कता जांच की थी। यह जांच उस समय की गई थी,जब मार्च में पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल 11.45 बजे के आसपास NSE पर यह शेयर 14.80 रुपए यानी 1.90 फीसदी की गिरावट के साथ 764 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। आज का इसका दिन का हाई 773.90 रुपए और दिन का लो 761.25 रुपए है। स्टॉक का ट्रेडिंग वॉल्यूम 2,64,47,759 शेयर का आसपास दिख रहा है।

27 मई को आई इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक HDFC Bank में एक आंतरिक सतर्कता जांच में MSRDC को किए गए 45 करोड़ रुपये के'डिफरेंशियल इंटरेस्ट'भुगतानों की जांच की गई। इस जांच में कथित तौर पर कई वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है,जिनमें बैंक के MD और CEO शशिधर जगदीशन भी शामिल हैं।

यह जांच बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के 18 मार्च को इस्तीफा देने से कुछ ही समय पहले शुरू की गई थी। उन्होंने अपने इस्तीफ़े की वजह बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं और तौर-तरीके बताए थे जो उनके निजी मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि HDFC बैंक के बोर्ड की ऑडिट कमेटी ने 12 मार्च को जांच का आदेश दिया। यह आदेश बैंक के मार्केटिंग विभाग के एक आंतरिक ऑडिट के बाद दिया गया,जिसमें कुछ लेन-देन पर सवाल उठाए गए थे और विभाग के कामकाज को असंतोषजनक बताया गया था।

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