Asian Paints : लगभग 15 साल से निवेशकों की आंखों का तारा रहे इस शेयर के दिन क्या बिगड़ गए हैं? क्या इसमें अच्छे रिटर्न देने का दम नहीं बचा है? या क्या इसके फंडामेंटल्स में कुछ बदलाव हुआ है? हम यहां पर देश की सबसे बड़ी पेंट कंपनी एशियन पेंट्स (Asian Paints) के शेयर की बात कर रहे हैं, जिसको लेकर इन दिनों इनवेस्टर्स के मन में कुछ ऐसे ही सवाल उठ रहे हैं। इसका प्रदर्शन इन दिनों शेयर बाजार में कमजोर बना हुआ है।
एक महीने में 12 फीसदी टूटा शेयर
पिछले एक महीने में एशियन पेंट्स का शेयर 12 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। पिछले छह महीने में शेयर में लगभग 21 फीसदी और एक साल में इसमें 11 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। सोमवार को इंट्रा डे में शेयर 3 फीसदी की गिरावट के साथ 2,585 रुपये का 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुचं गया था। मंगलवार को दोपहर 3 बजे से शेयर 1 फीसदी से ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। हमने यहां पर एशियन पेंट्स के शेयर में गिरावट की वजह तलाशने की कोशिश की है।
क्रूड की महंगाई ने बढ़ाई मुसीबत
Asian Paints के लिए कच्चे माल की कॉस्ट में क्रूड डेरिवेटिव्स की 30-40 फीसदी हिस्सेदारी होती है। यही वजह है कि क्रूड की कीमतें बढ़ने पर सीधे कंपनी के मार्जिन को झटका लगता है। कंज्यूमर्स पर महंगाई के दबाव के चलते कंपनी के लिए अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना संभव नहीं रहा है।
बीते कुछ महीनों के दौरान, क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। पिछले हफ्ते यह 13 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स फिलहाल 122 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है।
पेंट सेक्टर पर आदित्य बिड़ला ग्रुप का बड़ा दांव
आदित्य बिड़ला ग्रुप (Aditya Birla Group) की कंपनी ग्रेसिम इंडस्ट्रीज (Grasim Industries) ने पेंट बिजनेस में उतरने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के पूंजी खर्च का ऐलान किया है। कंपनी की वित्त वर्ष 24 की मार्च तिमाही तक उत्पादन शुरू करने की योजना है।
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में, ग्लोबल ब्रोकरेज जेफ्रीज ने ग्रेसिम के इस दांव की रिलायंस की टेलिकॉम इंडस्ट्री में जिओ के आगाज से तुलना की है। इससे क्षमता बढ़ी और टैरिफ में खासी कमी आई थी।
जेफ्रीज के विवेक माहेश्वरी ने कहा, भले ही अभी तक सफलता की कोई गारंटी नहीं है क्योंकि ब्रांडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की उसकी योजना पर कोई स्पष्टता नहीं है लेकिन उसकी आक्रामक स्ट्रैटजी के चलते मार्केट स्ट्रक्चर बिगड़ सकता है। इससे छोटी कंपनियों पर ज्यादा असर पड़ेगा, लेकिन कुछ असर एशियन पेंट्स पर भी होगा।
इस स्टॉक को कवरेज देने वाले 34 एनालिस्ट्स में से 15 ने इस पर खरीद की सलाह दी है, जबकि 10 ने मंदी का आउटलुक दिया है। ब्रोकरेजेस ने औसतन 3,359 का टारगेट प्राइस दिया है, जो मौजूदा मूल्य से 27 फीसदी ज्यादा है।
पीएमएस फंड मैनेजर सौरभ मुखर्जी ने कहा, बीते 20 साल में तीन बार ऐसे अवसर आए हैं जब क्रूड की कीमत दोगुनी हो गई है। हर मौके पर एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स अपने मजबूत फ्रेंचाइजी नेटवर्क के दम पर मार्जिन बरकरार रखने में कामयाब रही हैं। उचित समय पर कंपनियां कच्चे माल में लागत में बढ़ोतरी का बोझ कस्टमर्स पर डालती हैं।
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