ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ रही है लेकिन अब आपूर्ति में तेजी आ रही है। ऐसे में हमें लगता कि इस साल की दूसरी छमाही में महंगाई कम होती नजर आएगी। बेस मेटल्स में हमें ऐसा देखने को भी मिल रहा है जिसमें हमें पिछले महीनें में गिरावट देखने को मिली थी। ये बातें यूटीआई असेट मैनेजमेंट कंपनी ( UTI Asset Management Company) के एक्जीक्यूटिव वीपी और फंड मैनेजर वी श्रीवास्तव ने मनीकंट्रोल को दिए गए एक इंटरव्यू में कही।
वी श्रीवास्तव का मानना है कि अगर आपको अपने पोर्टफोलियो को महंगाई और मंदी प्रूफ बनाना है तो आपको यूटिलिटीज और एफएमसीजी पर फोकस करना चाहिए। इन दोनों सेक्टरों में वर्तमान स्थितियों में भी आउटपरफॉर्म करने की सबसे बेहतर संभावना नजर आ रही है। UTI AMC की राय है कि बैंकिंग, ऑटो मोबाइल और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टरों की डिमांड आउटलुक मजबूत बनी हुई है। इन पर महंगाई का अस्थाई प्रभाव होगा।
क्या ब्याज दरों में बढ़ोतरी से अमेरिका में मंदी की संभावना है? इस सवाल का जवाब देते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी बाजार के उम्मीद के अनुरूप रही है। अब RBI को भी महंगाई से निपटने और अमेरिका और भारत के ब्याज दरों के बीच के अंतर की भरपाई करने के लिए अपनी दरों में बढ़ोतरी करनी होगी। अब आगे बाजार की गति महंगाई की दर और इससे निपटने के लिए RBI के कदमों पर निर्भर करेगी। उम्मीद है कि बाजार में डिमांड बढ़ती नजर आएगी। जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी का नेगेटिव असर कुछ कम होगा।
हम अपने पोर्टफोलियो को कैसे मंदी और महंगाई प्रूफ बनाएं? इस सवाल का जवाब देते हुए श्रीवास्तव ने आगे कहा कि पोर्टफोलियो बनाने का हमारा नजरिया इस अनुमान पर आधारित नहीं है कि वर्तमान मंदी या महंगाई का दौर 2-3 तिमाहियों का ज्यादा नहीं होगा। हमारा फोकस उन सेक्टरों पर है, जिनको घरेलू इकोनॉमी की रिकवरी में फायदा होगा। इनमें बैंकिंग, ऑटो मोबाइल, कैपिटल गुड्स, जैसे सेक्टर शामिल हैं। हमारा मानना है कि इन सेक्टरों के लिए डिमांड में मजबूती बनी हुई है। इन पर महंगाई का प्रभाव अस्थाई होगा। वहीं अगर कोई महंगाई और मंदी प्रूफ पोर्टफोलियो बनाना चाहता है तो इसके FMCG और यूटिलिटीज पर फोकस करना चाहिए। जिन पर महंगाई का प्रभाव सबसे कम होगा।
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