Manu Rishi Guptha : होटल कारोबारी से फंड मैनेजर बने मनु ऋषि गुप्ता लंबे समय से आईटीसी (ITC) की नीतियों को लेकर निराशा जाहिर करते रहे हैं। इसको लेकर आईटीसी उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा (defamation lawsuit) भी दायर कर चुकी है। गुप्ता का मानना है कि कंपनी अपने कोर बिजनेस से कमाई करके, होटल और एफएमसीजी जैसे दूसरे बिजनेस में लगा रही है जो सही नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि शेयर ओवरवैल्यूड है और इसे 200 रुपये के आसपास ट्रेड करना चाहिए। हालांकि, इस साल आईटीसी निफ्टी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयरों में से एक रहा। गुप्ता ने मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में ये विचार व्यक्त किए।
एक शेयरहोल्डर के रूप में चिंता जाहिर करने का है अधिकार
गुप्ता कहते हैं कि उनके पास व्यक्तिगत क्षमता के साथ आईटीसी की बड़ी हिस्सेदारी है। इसलिए, मुझे एक शेयरहोल्डर के रूप में अपनी चिंता जाहिर करने का अधिकार है। उनके द्वारा 2019 में शुरू किए गए फंड एमआरजी कैपिटल (MRG Capital) की 100 करोड़ रुपये की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) है। इसकी टॉप होल्डिंग्स में इंफोसिस (Infosys), आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज (ICICI Securities) और टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals) शामिल हैं। हालांकि, उनके फंड की कुल एसेट्स में आईटीसी के काफी कम शेयर हैं।
आईटीसी अच्छी कंपनी, लेकिन स्ट्रैटजी सही नहीं
गुप्ता ने कहा, आईटीसी एक अच्छी कंपनी है। लेकिन कंपनी लॉन्ग टर्म स्ट्रैटजी और कैपिटल अलोकेशन पॉलिसीज पर खासा विचार करने की जरूरत है। एक शेयरहोल्डर के रूप में, मुझे उम्मीद है कि मेरे तर्क और डेटा पर आधारित मेरी राय से उन्हें कंपनी को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
अपने कोर बिजनेस पर करना चाहिए फोकस
उन्होंने कहा, आईटीसी का सिगरेट बिजनेस भारी कैश जेनरेट करने वाली मशीन है। लेकिन इसमें से ज्यादातर कैश एफएमसीजी और होटल बिजनेस में इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां एबिटडा मार्जिन सिंगल डिजिट में है। वहीं, आईटीसी के एफएमसीजी बिजनेस की कॉम्पीटिटर्स ब्रिटानिया, एचयूएल और नेस्ले 20 फीसदी से ज्यादा के एबिटडा मार्जिन पर बिजनेस कर रही हैं। इसी तरह, आईएचसीएल और लेमनट्री 40 फीसदी से ज्यादा एबिटडा मार्जिन पर काम कर रही हैं। आईटीसी को अपने कोर बिजनेस पर जोर देना चाहिए और ज्यादा कैपिटल बर्बाद नहीं करनी चाहिए।
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