आरबीआई ने आज मंहगाई के दबाव से निपटने और इकोनॉमी में अतिरिक्त लिक्विडिटी को कम करने के लिए अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके बाजार को बड़ा झटका दिया। आरबीआई द्वारा 2 बजे के बाद ब्याज दरों में बढ़ोतरी के ऐलान के चलते पहले से सुस्त चल रहा बाजार एक दम से धड़ाम हो गया। सेंसेक्स गवर्नर शक्तिकांत दास की बीफ्रिंग से पहले 600 प्वाइंट नीचे नजर आ रहा था लेकिन इस ब्रिफिंग के बाद सेंसेक्स 1,307 अंक टूट गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 2.29 फीसदी टूटकर 55,669.03 के स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी पर भी इसका असर देखने को मिला और यह अपने सभी अहम सपोर्ट को तोड़ते हुए मार्च महीने के लो के करीब बंद हुआ। निफ्टी आज 391.50 अंक यानी 2.29 फीसदी की गिरकर 16,677.60 के स्तर पर बंद हुआ।
आज के कारोबार में निवेशकों ने सिर्फ एक दिन में 6.1 लाख करोड़ रुपये गवां दिए हैं। बीएसई का मार्केट कैप पिछले कारोबारी दिन के 265.88 लाख करोड़ रुपये से घटकर 259.73 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है।
बता दें कि पिछले 1 महीने में निवेशकों को करीब 14 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। 5 अप्रैल को बीएससी का मार्केट कैप 273.73 लाख करोड़ रुपये था जो कि आज गिरकर 259.73 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है।
आरबीआई ने आज हुई अपनी अनशेड्युल्ड मीटिंग में रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करके इसको 4.4 फीसदी कर दिया है जबकि सीआरआर में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करके इसको 4.5 फीसदी कर दिया है।
Geojit Financial Services के वी के विजय कुमार का कहना है कि एलआईसी के आईपीओ की ओपनिंग तिथि को ऐसा किया जाना आश्चर्यजनक है। उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती महंगाई को नियत्रंण में लाने के लिए आरबीआई का यह कदम सही है लेकिन ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने का समय सही नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि एलआईसी के आईपीओ के ओपनिंग के दिन सेंसेक्स में 1000 अंकों से ज्यादा की गिरावट ने बाजार सेंटिमेंट को खराब कर दिया है। 10-year बॉन्ड यील्ड 7.39 फीसदी के ऊपर पहुंच गया है जो फंड लागत में संभावित बढ़ोतरी की और संकेत कर रहा है।
Finrex Treasury Advisors के अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि CRR में की गई बढ़ोतरी से बाजार से तत्काल तौर पर 87,000 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी बाहर हो जाएगी। इसके अलावा अगले 5-6 महीनों में कई कारणों के चलते 2 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी और घटती नजर आएगी।
बाजार की आगे की चाल पर बात करते हुए शेयर खान के संजीव होता ने कहा कि नियरटर्म में बाजार में वौलेटिलिटी बनी रहेगी और बाजार दायरे में बंधा नजर आएगा। बाजार को आरबीआई की पॉलिसी में एका-एक आए इस बदलाव को पचाने में कुछ समय लगेगा। बाजार की नजर अब आज आने वाले यूएस फेड के फैसले और उसके गाइडेंस पर रहेगी।
उन्होंने आगे कहा कि नियर टर्म की चुनौतियों के बावजूद हम अगले 2-3 वर्षों के नजरिए से इक्विटी मार्केट को लेकर पॉजिटिव रुख रखते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैक्रो चुनौतियों के हल्के पड़ने के साथ ही आगे कंपनियों के प्रदर्शन में मजबूती की उम्मीद है। इसके अलावा सरकार के ग्रोथ केंद्रित नीतियों के चलते भारत में हमें एक मल्टी ईयर इकोनॉमिक अपसाइकल देखने को मिलेगा।
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