SBI chairman Dinesh Kumar Khara : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा ने कहा कि सरकार के स्वामित्व वाले लेंडर को वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक यस बैंक (Yes Bank) में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 26 फीसदी करने से कोई समस्या नहीं है, जो 30 जून तक 30 फीसदी थी।
हालांकि, देश के सबसे बड़े बैंक के जून तिमाही के नतीजे पेश करते हुए खारा ने कहा कि इस पर अभी बोर्ड को फैसला करना है कि क्या एसबीआई, यस बैंक में 26 फीसदी हिस्सेदारी रखेगा।
हिस्सेदारी 26 फीसदी तक घटने से मुझे कोई समस्या नहीं
नतीजों के ऐलान के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खारा ने कहा, “मार्च, 2023 तक, हमें यस बैंक में 26 फीसदी हिस्सेदारी रखने की जरूरत है। यदि मार्च, 2023 तक हमारी हिस्सेदारी 26 फीसदी तक हो जाती है तो मुझे कोई समस्या नहीं है। इससे आगे हमने बोर्ड के स्तर पर विचार नहीं किया है, इसलिए भविष्य की अपनी योजना पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता।”
किस बैंक की कितनी हिस्सेदारी
जून के अंत तक एसबीआई के पास यस बैंक की 30 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक की 3 फीसदी हिस्सेदारी थी। वहीं एक्सिस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और बंधन बैंक सभी के पास 1 और 2 फीसदी के बीच हिस्सेदारी है।
लेंडर्स के एक कंसोर्टियम का प्रमुख होने के नाते एसबीआई ने 2020 में संकट में फंसे यस बैंक में 10,000 करोड़ रुपये की इमरजेंसी कैपिटल लगाई थी, जब उसने बैंकरप्सी के लिए आवेदन किया था। रिकंस्ट्रक्शन स्कीम के तहत एसबीआई और अन्य लेंडर्स को 2023 के अंत अपने शेयर बरकरार रखने होंगे।
यस बैंक के एमडी ने क्या कहा
इससे पहले यस बैंक के एमडी और सीईओ प्रशांत कुमार ने 3 अगस्त को मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा था कि अच्छे रिटर्न को देखते हुए एसबीआई मुंबई हेडक्वार्टर वाले बैंक में अपनी हिस्सेदारी बाद में भी बनाए रख सकता है। कुमार ने कहा था, यदि कोई निवेश मुझे अच्छा रिटर्न दे रहा है तो मुझे लगता है कि लोग बने रहना चाहेंगे। लेकिन फिर से मैं कहूंगा कि यह फैसला संबंधित एंटिटीज को लेना है।