भारत का आर्थिक ग्रोथ की लंबे समय से चीन के साथ तुलना की जाती रही है। खासतौर से जब बात ग्लोबल वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की हो। UBS सिक्योरिटीज इंडिया की चीफ इकोनॉमिस्ट, तन्वी गुप्ता जैन का कहना है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ से काफी आशाजनक संकेत मिलते हैं, लेकिन चीन की आर्थिक ऊंचाई तक पहुंचने का रास्ता थोड़ा लंबा और जटिल है। हालांकि कोरोना महामारी के बाद से, भारत और चीन की आर्थिक स्थिति में बड़ा अंतर आया है।
चीन की इकोनॉमी को उम्रदराज होती जनसंख्या सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसने उसकी ग्रोथ रेट को धीमा कर दिया है। वहीं भारत की आर्थिक ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। जैन का कहना है कि भारत की युवा श्रम शक्ति, बेहतर होते इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल स्तर पर पॉजिटिव छवि ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ के लिए एक अच्छा माहौल तैयार किया है।
हालांकि, भारत की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में हिस्सेदारी अभी सिर्फ 3% है, जबकि चीन की 30%। जैन ने हमारे सहयोगी CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि अगले दशक में भारत की यह हिस्सेदारी दोगुनी हो सकती है, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, श्रम उत्पादकता में कमी, और नियामकीय प्रक्रियाओं में देरी जैसी चुनौतियां इस प्रगति को प्रभावित कर सकती हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद, जैन का मानना है कि भारत अपने बड़े घरेलू बाजार और सस्ती श्रम शक्ति का फायदा उठाकर मैन्युफैक्चरिंग में तेजी ला सकता है। हालांकि इसके बावजूद यह ग्रोथ चीन के जैसी नहीं होगी, खासतौर से एनर्जी और टेक्सटाइल्स वस्तुओं की मांग के मामले में।
चीन के विपरीत, भारत की सेवाओं पर आधारित अर्थव्यवस्था और अलग शहरीकरण पैटर्न इस ओर इशारा करते हैं कि इसके ग्रोथ की राह कम पूंजी और एनर्जी पर आधारित होगी, जो लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक लक्ष्यों को पाने के लिए एक अलग नजरिए की जरूरत को बताता है।
जब जैन से पूछा गया कि क्या भारत अगला चीन बन सकता है, तो उन्होंने कहा, "महामारी के बाद से, भारत और चीन की आर्थिक तरक्की में काफी अंतर आया है। चीन की रिकवरी धीमी रही है, जबकि भारत की आर्थिक ग्रोथ अब तक मजबूत बनी हुई है। भारत का युवा और बढ़ता श्रम बल और उसके मुताबिक ग्लोबल वातावरण उसे एक अलग दिशा में ले जा रहे हैं। हालांकि हम नहीं कह सकते कि भारत चीन की तरह जल्दी ही उतनी बड़ी और समृद्ध अर्थव्यवस्था बन जाएगा, लेकिन लंबे समय में, भारत का आकार चीन के बराबर हो सकता है।"