शनिवार को अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया और उसके लंबे समय से राष्ट्रपति रहे निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया। इस हमले के बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल एसेट्स पर भी कंट्रोल कर लिया है। वेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिका के कब्जे का मतलब वेनेजुएला के कच्चे तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों का हटना हो सकता है। वैसे तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया है कि फिलहाल वेनेजुएला के तेल उद्योग पर प्रतिबंध जारी रहेंगे। लेकिन अगर प्रतिबंध हटा दिए जाते हैं तो भारत की ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) लिमिटेड को सैन क्रिस्टोबल फील्ड से 50 करोड़ डॉलर का बकाया डिविडेंड मिल सकता है।
यह बकाया 2014 तक का है। 2014 के बाद प्रोडक्शन बंद हो गया था, जिसका मतलब है कि उस समय के बाद से कोई डिविडेंड नहीं मिला। ONGC की सब्सिडियरी ONGC विदेश की वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल प्रोजेक्ट में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा ONGC विदेश लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) और ऑयल इंडिया की कैराबोबो-1 फील्ड में 11 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अपने नोट में लिखा है कि ONGC के लिए मीडियम-टर्म रिस्क वेनेजुएला का फिर से शुरू हुआ प्रोडक्शन होगा। इससे दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी और तेल की ग्लोबल कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। अगर कच्चे तेल के दाम गिरते हैं, तो इसका ONGC की कमाई पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ONGC शेयर में तेजी के बाद गिरावट
Oil and Natural Gas Corporation Ltd के शेयरों में 5 जनवरी को पहले तेजी और बाद में गिरावट दिखी। शेयर BSE पर बढ़त में खुला और फिर 246.55 रुपये के हाई तक गया। बाद में इसने 235.75 रुपये का लो देखा। कारोबार के अंत में शेयर 1.45 प्रतिशत गिरावट के साथ 238 रुपये पर सेटल हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 3 लाख करोड़ रुपये के करीब है। शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है। कंपनी में सितंबर 2025 के आखिर तक सरकार के पास 58.89 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।
सरकारी कंपनी ONGC का जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही में शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत गिरकर 9848 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 11984 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,37,846.29 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस बीच शुद्ध मुनाफा 35,610.32 करोड़ रुपये रहा।
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