Iran War Impact : RBI FY27 में दरों में कर सकता है 25–50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी, टल सकते हैं कैपेक्स के फैसले

Iran War Impact : Q4FY26 के अर्निंग आंकड़ों को देखते हुए हिमांशु कोहली को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में हुई हाल के घटनाओं के चलते,सभी कंपनियों का मैनेजमेंट अपनी टिप्पणियों में ज़्यादा सतर्क नजरिया अपनाएगा

अपडेटेड Apr 03, 2026 पर 11:56 AM
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April RBI Policy : हम नए वित्त वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। RBI के लिए नीतिगत हालात और भी ज़्यादा चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई के जोखिम को और बढ़ा रही हैं

Iran War Impact : बयानबाज़ी के ताज़ा दौर को देखते हुए ऐसा लगता है कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध और लंबा खिंच सकता है और निकट भविष्य में इसका कोई समाधान निकलने की संभावना कम ही है। ऐसे में RBI निकट भविष्य में दरों को स्थिर रख सकता है। लेकिन अगर एनर्जी प्राइस में बढ़त के चलते महंगाई ऊंचे स्तरों पर बनी रहती है और इसका दायरा बढ़ता है,तो FY27 में दरों में 25–50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना है। ये बातें क्लाइंट एसोसिएट्स के को-फाउंडर हिमांशु कोहली ने मनीकंट्रोल से हुए एक बातचीत में कही हैं।

Q4FY26 के अर्निंग आंकड़ों को देखते हुए,उन्हें उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में हुई हाल के घटनाओं के चलते,सभी कंपनियों का मैनेजमेंट अपनी टिप्पणियों में ज़्यादा सतर्क नजरिया अपनाएगा। इसके अलावा,उन्होंने Moneycontrol को दिए इंटरव्यू में कहा कि मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए,पूंजीगत खर्च (capex) से जुड़े फ़ैसले टलने की संभावना है।

क्या पश्चिम एशिया संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल देशों के बयानों को देखते हुए, आपको निकट भविष्य में इस युद्ध का कोई समाधान नज़र आता है?


दोनों पक्षों के प्रयासों के बावजूद,संघर्ष के पांचवें सप्ताह में भी भू-राजनीतिक तनाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। खाड़ी के कई देश,जिनकी अर्थव्यवस्थाएं मुख्य रूप से कच्चे तेल के निर्यात पर निर्भर हैं,इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। कुछ देशों द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़'से गुज़रने के संबंध में कुछ छूट (waivers) पर बातचीत किए जाने के शुरुआती संकेत मिले हैं। हालांकि,इस संघर्ष के किसी स्थायी समाधान पर पहुंचना अभी जल्दबाज़ी होगी। बयानबाज़ी के ताज़ा दौर को देखते हुए ऐसा लगता है कि युद्ध और आगे बढ़ सकता है और निकट भविष्य में इसके समाधान की संभावना कम ही है।

क्या कोई डेटा पॉइंट देशों को युद्ध रोकने पर मजबूर कर सकता है?

इतिहास बताता है कि लंबा चलने वाला युद्ध किसी भी देश के लिए अच्छा नहीं होता। समय के साथ,यह कमोडिटी चैनल के ज़रिए फाइनेंशियल मार्केट पर अपना असर दिखाता है। इससे महंगाई बढ़ती है। अगर यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है,तो इसका मांग पर भी असर पड़ सकता है और यह अर्थव्यवस्था,कंपनियों और आम उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाना शुरू कर सकता है।

युद्ध के इतिहास को देखें,तो वित्तीय बाजारों पर इसका असर आमतौर पर संघर्ष शुरू होने के 2 से 6 हफ़्तों तक रहता है। हालांकि,हम पहले ही पांचवें हफ़्ते में पहुंच चुके हैं। ऐसे में यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि इस बार स्थिति कुछ अलग होगी या नहीं।

क्या आपको लगता है कि युद्ध का सबसे ज़्यादा असर Q1FY27 की अर्निंग पर पड़ेगा,जबकि Q4FY26 में इसका असर कम रहेगा?

अगर हम रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई घटनाओं के आधार पर देखें तो कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों का असर मार्जिन पर एक तिमाही की देरी से पड़ने की संभावना है। चूंकि युद्ध मार्च में शुरू हुआ था और सरकार तथा OMCs (तेल विपणन कंपनियों) ने कच्चे तेल की कीमतों के असर को काफी हद तक कम कर दिया था,इसलिए Q4FY26 की अर्निंग्स पर इसका बहुत मामूली असर देखने को मिल सकता है।

अगर यह संघर्ष जारी रहता है,तो Q1FY27 और शायद Q2FY27 में मार्जिन में कमी महसूस की जा सकती है। मैटेरियल्स (केमिकल्स,पेंट्स,फर्टिलाइजर्स,सीमेंट,मेटल्स),OMCs,यूटिलिटीज,लॉजिस्टिक्स,एयरलाइंस और कंज्यूमर स्टेपल्स जैसे सेक्टर्स के मार्जिन पर सबसे ज़्यादा असर पड़ सकता है। अगर यह संकट लंबा खिंचता है,तो इसका दूसरा असर मांग में कमी के रूप में दिख सकता है।

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2026 के लिए आप RBI से क्या उम्मीद करते हैं?

हम नए वित्त वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। RBI के लिए नीतिगत हालात और भी ज़्यादा चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई के जोखिम को और बढ़ा रही हैं। हालांकि, सरकार ने इस झटके के कुछ हिस्से को खुद पर लेने की कोशिश की है,लेकिन राजकोषीय घाटे को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण यील्ड बढ़ रही है। इसके अलावा,सरकार की ओर से क्रेडिट की बढ़ी हुई मांग भी यील्ड को और कड़ा कर रही है, जिसके चलते बेंचमार्क 10-वर्षीय G-Sec यील्ड हाल ही में 7 फीसदी के आंकड़े को पार कर गई है।

हालांकि भारत इस दौर में तब दाखिल हुआ जब महंगाई काफी हद तक काबू में थी (फरवरी 2026 में रिटेल महंगाई 3.21 फीसदी थी), इसलिए RBI शायद कुछ समय के लिए दरों में कोई बदलाव न करे। लेकिन अगर एनर्जी की वजह से होने वाली महंगाई बनी रहती है और इसका दायरा बढ़ता है तो FY27 में दरों में 25–50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना है। करेंसी के फ्रंट पर RBI शायद उतार-चढ़ाव को काबू में रखने के लिए रेगुलेटरी सख्ती (जैसा कि उसने पिछले हफ़्ते बैंकों की फ़ॉरेक्स पोज़िशनिंग के लिए किया था) और मार्केट में दखल (फ़ॉरेक्स रिज़र्व का इस्तेमाल करके) का इस्तेमाल करता रहेगा।

इस तरह के फॉरेक्स ऑपरेशन्स से होने वाली लिक्विडिटी की कमी की भरपाई करने के लिए RBI ज़रूरत के हिसाब से OMOs (ओपन मार्केट ऑपरेशन्स)या दूसरे लिक्विडिटी उपायों के ज़रिए बॉन्ड मार्केट को सपोर्ट देना भी जारी रख सकता है।

 

 

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