Iran War Impact : वेस्ट एशिया में जंग का असर मैन्युफैक्चरिंग पर पड़ना शुरू हो गया है। रॉ-मटीरियल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और लेबर शॉर्टेज से MSME मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के प्रोडक्शन में 50 फीसदी की कमी आ चुकी है। MSMEs ने रॉ-मटीरियल की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार से GST घटाने और जमाखोरी रोकने की मांग की है। नोएडा के मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर से सीएनबीसी-आवाज़ के आलोक प्रियदर्शी की ग्राउंड रिपोर्ट में बताया गया है कि वेस्ट एशिया में युद्ध के लंबा खींचने की वजह से MSMEs इंडस्ट्री की हालत गंभीर हो गई है।
MSME यूनिट्स में प्रोडक्शन आधा
इस युद्ध के चलते एल्यूमीनियम,कॉपर और पीवीसी जैसे रॉ मटेरियल की कीमतें बढ़ी हैं। पिछले 2 महीने में एलॉय एल्यूमिनियम के दाम में करीब 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। एलॉय एल्यूमिनियम की कीमत 240 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 310 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। यूरोप और USA से ज्यादातर एलॉय एल्यूमिनियम का इंपोर्ट होता है। MSME यूनिट्स की प्रोडक्शन कैपेसिटी 100 टन से गिरकर प्रति दिन 56 टन पहुंच गई है।
MSME कॉपर और पीवीसी जैसे रॉ मटेरियल के संकट से जूझ रहे हैं। कॉपर के दामों में करीब 40 फीसदी तो PVC के दामों में 80 फीसदी का इजाफा हुआ है। कॉपर का रेट 800 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 1400 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है। PVC कंपाउंड का दाम 110 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 210 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है। इनसे ऑडियो केबल बनती है जो इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स में इस्तेमाल होती है।
LPG के संकट से लेबर गांवों की तरफ पलायन कर रहे हैं। नोएडा में करीब 8500 से ज्यादा MSME मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं। MSMEs की रॉ मटेरियल पर 18 फीसदी GST को घटाने की मांग की है।
ईरान के साथ इजरायल अमेरिका की जंग ने गुजरात की इंडस्ट्री को भी चपेट में ले लिया है। गुजरात में उद्योग जगत के लोगों ने सरकार से कई मांगें रखी हैं और कुछ सलाह भी दी है। इंडस्ट्री का कहना है कि युद्ध के चलते उद्योगों को नुकसान हो रहा है। ऐसे में लॉजिस्टिक्स और शिपिंग में राहत दी जानी चाहिए। कंटेनर के रेट बढ़े हैं। इनकी उपलब्धता घटी है। इस समस्या से निपटने के लिए MSME और छोटे एक्सपोर्टर राहत चाहते हैं।
इंडस्ट्री का कहना है कि ब्याज में छूट से वर्किंग कैपिटल में मदद मिलेगी। सरकार से रॉ मैटेरियल उपलब्धता में मदद करने की मांग की जा रही है। जहाजों की सुरक्षा और बीमा पर भी फोकस करने की मांग हो रही है। इंडस्ट्री ईंधन के विकल्प में इलेक्ट्रिसिटी चाहती है। रिसायकलिंग से रॉ मैटेरियल की व्यवस्था करने की भी मांग की जा रही है।