संवत 2081 में चुनिंदा शेयरों में ही बनेंगे पैसे, फार्मा और BFSI शेयरों पर रहे फोकस -प्रभुदास लीलाधर की अमीषा वोरा

नए साल में निवेशकों के अपने पोर्टफोलियो को डिफेंसिव टिल्ट देते हुए ग्रोथ पर भी फोकस रखना है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में कुछ फार्मा शेयरों को जरूर जोड़ना चाहिए। इनमें अच्छी अर्निग्स ग्रोथ दिखेगी

अपडेटेड Nov 02, 2024 पर 3:20 PM
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एफआईआई की बिकवाली और बाजार पर उसके असर पर बात करते हुए अमीषा वोरा ने कहा कि एफआईआई की भारी बिकवाली में हमारे बाजार का महंगा होना एक बड़ा कारण है। अब एफआईआई की बिकवाली और लंबी खिंचने की संभावना नहीं है

बाजार पर बात करते हुए प्रभुदास लीलाधर की अमीषा वोरा ने कहा कि संवत 2081 में भी पैसे बनेंगे लेकिन चुनिंदा शेयरों में बनेंगे। इस अवधि में थोड़ा डिफेंसिव रहने की जरूरत है। नए साल में निवेशकों के अपने पोर्टफोलियो को डिफेंसिव टिल्ट देते हुए ग्रोथ पर भी फोकस रखना है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में कुछ फार्मा शेयरों को जरूर जोड़ना चाहिए। इनमें अच्छी अर्निग्स ग्रोथ दिखेगी। ये अभी न तो ओवरबॉट और न ही ओवरवैल्यूड हैं। इन शेयरों में सिप्ला, डिवीज लैब और ल्यूपिन जैसे नाम शामिल है। इन तीनों में इस बार अर्निग्स ग्रोथ बहुत अच्छी रहने की उम्मीद है।

बीएफएसआई सेगमेंट भी अच्छा

इसके अलावा संवत 2081 के लिए अमीषा वोरा को बीएफएसआई सेगमेंट भी अच्छा दिख रहा है। लेकिन उनका कहना है कि इस सेगमेंट को थोड़ा अलग नजरिए से देखना चाहिए। प्राइवेट सेक्टर बैंक में आईसीआईसीआई बैंक बहुत अच्छा कर रहा है। इसकी पोर्टफोलियो क्वालिटी भी मेंटेन है, लागत स्तर भी अच्छी स्थिति में है। ऐसे में अगर 1 साल में कभी भी दरों में गिरावट का दौर शुरू होता है तो बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर बहुत दबाव नहीं आएगा। इस स्टॉक में निवेश फायदेमंद रहेगा।


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असेट मैनेजमेंट और इंश्योरेंस कंपनियां भी अच्छी

इसके अलावा नए साल के लिए मीषा वोरा को असेट मैनेजमेंट और इंश्योरेंस कंपनियां भी अच्छी लग रही हैं। उनकी एचडीएफसी इंश्योरेंस और निप्पॉन असेट मैनेजमेंट में निवेश की सलाह है।

 आगे भी सेकेंडरी मार्केट को प्राइमरी मार्केट से करनी होगी प्रतिस्पर्धा

एफआईआई की बिकवाली और बाजार पर उसके असर पर बात करते हुए अमीषा वोरा ने कहा कि एफआईआई की भारी बिकवाली में हमारे बाजार का महंगा होना एक बड़ा कारण है। अब एफआईआई की बिकवाली और लंबी खिंचने की संभावना नहीं है। इस समय सेकेंडरी मार्केट पर सबसे बड़ा दबाव प्राइमरी मार्केट से बन रहा है। आगे भी सेकेंडरी मार्केट को प्राइमरी मार्केट से प्रतिस्पर्धा करनी होगी।

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