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US में बॉन्ड यील्ड बढ़ने क्यों डरे बाजार, जानिए बॉन्ड यील्ड का बाजारों पर क्यों होता है असर

अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़ने से दुनियाभर के बाजारों में कोहराम मचा हुआ है.

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 27, 2021 पर 9:18 AM
US में बॉन्ड यील्ड बढ़ने क्यों डरे बाजार, जानिए बॉन्ड यील्ड का बाजारों पर क्यों होता है असर

अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़ने से दुनियाभर के बाजारों में कोहराम मचा हुआ है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का बाजारों में क्यों है हाहाकार और करेंसी पर इसका क्या असर  दिखेगा ये बताते हुए सीएनबीसी आवाज़ के बैंकिंग एडीटर प्रदीप पंड्या ने बताया कि अमेरिका में 10 साल की बांड यील्ड 1.61 फीसदी तक पहुंच गया है। यूएस में बॉन्ड यील्ड साल भर के उच्चतम स्तर पर है।
 
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डर क्यों?

आमतौर पर देखने को मिलता है  कि जब-जब बॉन्ड यील्ड में उछाल आता है, इक्विटी मार्केट पर दबाव बढ़ जाता है। हाल के दिनों में भी ऐसा नजारा देखने को मिला, जब शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट में बॉन्ड यील्ड में तेजी का भी योगदान रहा। लगातार 5 सेशन में शेयर बाजार में गिरावट आई, वहीं दूसरी ओर बेंचमार्क 10 ईयर गवर्मेंट बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 6.20 फीसदी हो गई। बॉन्ड यील्ड और मार्केट में कनेक्शन पर नजर डालें तो साफ होता है कि  बॉन्ड यील्ड बढ़ने से लोग शेयर बाजार से पैसे निकलकर बांड में डालने लगते हैं। इक्विटी मार्केट में ज्यादा जोखिम होता है। ऐसे में निवेशकों को लगता है कि जब बॉन्ड जैसे कम जोखिम वाले निवेश में अच्छा रिटर्न मिल रहा तो इक्विटी निवेश का जोखिम क्यों लिया जाए। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से दुनियाभर के बाजारों से FII निवेशकों का पैसा निकलने का डर पैदा हो जाता है और बाजार गिरने लगता है। ऐसा होने पर कर्ज लेकर निवेश करने वाले FII को पोजीशन काटनी पड़ती है जिससे खतरा और बढ़ जाता है।

बॉन्ड यील्ड में बढ़त इकोनॉमी की ऊंची ब्याज दरों को दर्शाता है। उच्च ब्याज दरें कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज लागत  को बढ़ा देती हैं। इससे उनके लिए और कर्ज लेना मुश्किल हो जाता है। इसका कंपनियों के मुनाफे और शेयरधारकों के रिटर्न पर असर पड़ता है। डेट की अधिक मात्रा वाले कंपनियों के शेयर खासतौर पर प्रभावित होते हैं। उच्च ब्याज दरें होम लोन ईएमआई जैसी चीजों पर लागत को बढ़ाकर कंज्यूमर को भी प्रभावित करती हैं और इकोनॉमी में डिमांड घट जाती है।

भारतीय बाजारों में भी यील्ड बढ़े

भारत में 10 साल के सरकारी बांड की यील्ड 6.18 फीसदी से बढकर 6.23 फीसदी पर आ गई है। आज होने वाला 24000 करोड़ रुपए का ऑक्शन डिजॉल्व होने का डर है। देश में बॉन्ड यील्ड अगस्त 2020 के बाद के उच्चतम स्तर पर है। बांड की यील्ड बढ़ने के साथ ही रुपए में भी गिरावट दिख रही है। बजट के बाद रुपया पहली बार 73 के नीचे गया है। आज रुपए में करीब 70 पैसे की गिरावट आई है। डॉलर में रिकवरी के चलते रुपया कमजोर हुआ है।

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