हांग कांग को पीछे छोड़ भारत का स्टॉक मार्केट हुआ आगे, वर्ल्ड टॉप 4 में पहुंचा

पहली बार इंडियन स्टॉक एक्सचेंज ने हांग कांग स्टॉक एकस्चेंज को मात दी है। इसके साथ ही साउथ एशियाई देसों में वो एक लीडर के तौर पर उभरा है। मुंबई स्थित Axis Mutual Fund चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर के मुताबिक इंडिया में ग्रोथ को बढ़ाने वाले सारे सही फैक्टर्स हैं। भारतीय शेयरों में लगातार तेजी हांगकांग में हो रही ऐतिहासिक गिरावट के साथ मेल खा रही है

अपडेटेड Jan 23, 2024 पर 10:40 AM
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भारत बना साउथ एशियाई देशों का टॉप स्टॉक एक्सचेंज हांग कांग को छोड़ा पीछे

भारत के स्टॉक मार्केट ने पहली बार हांग कांग के स्टॉक मार्केट को पीछे छोड़ते हुए साउथ एशियाई देशों में नंबर एक पायदान हासिल किया है। भारत अपनी नई पॉलिसीज और नए पॉलिसी रिफॉर्म्स के बल पर अब दक्षिण एशियाई इनवेस्टर्स की पहली पसंद बन गया है। इंडियन एक्सचेंजेस में लिस्ट किए गए शेयरों की वैल्यू सोमवार को 4.33 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई। ब्लूमबर्ग द्वारा शेयर किए गए डाटा के मुताबिक इसकी तुलना में हांग कांग के एक्सचेंजेस में लिस्ट किए गए शेयरों की कुल वैल्यू 4.29 ट्रिलियन डॉलर है।

भारत को मिली बढ़त

इसके साथ ही भारत हांग-कांग से आगे हो गया है। अब भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा इक्विटी मार्केट बन गया है। 5 दिसंबर को भारतीय स्टॉक मार्केट की कैपिटलाइजेशन 4 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई थी। भारत में इक्विटीज में तेजी से इजाफा देखने को मिल रहा है। इसके पीछे का सारा श्रेय तेजी से बढ़ते रिटेल इनवेस्टर्स और मजबूत कॉर्पोरेट अर्निंग्स है। दुनिया का सबसे आबादी वाला देश अब चीन के ऑल्टरनेट की तरह उभरा है। भारतो को ग्लोबल इनवेस्टर्स और कंपनियों से लगातार कैपिटल मिल रहा है वजह है इसकी शानदार इकोनॉमी और स्टेबल पॉलिटिक्स। यही वजह है कि भारत तेजी के साथ दूसरे देशों को पीछे छोड़ विकास की राह पर बढ़ता जा रहा है।

हांग कांग में हुई ऐतिहासिक गिरावट

मुंबई स्थित Axis Mutual Fund चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर के मुताबिक इंडिया में ग्रोथ को बढ़ाने वाले सारे सही फैक्टर्स हैं। भारतीय शेयरों में लगातार तेजी हांगकांग में हो रही ऐतिहासिक गिरावट के साथ मेल खा रही है। बीजिंग में कड़े कोविड-19 प्रतिबंधों, प्रॉपर्टी सेक्टर में आए क्राइसिस और पश्चिम के साथ जारी भू-राजनीतिक तनाव ने मिलकर दुनिया के विकास इंजन के रूप में चर्चित चीन का बंटाधार कर दिया है। चीनी और हांगकांग के शेयरों का कुल बाजार मूल्य में 2021 में 6 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी। IPO पेशकश के लिए दुनिया के सबसे बिजी रहने वाला हांग कांग अब अपनी पोजिशन खो रहा है।

भारत के पक्ष में हैं सारी स्थितियां


हालांकि, कुछ रणनीतिकारों को अभी भी बदलाव की उम्मीद है। नवंबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूबीएस ग्रुप एजी का मानना ​​है कि 2024 में चीनी शेयर भारतीयों से बेहतर परफॉर्म करेंगे। इस महीने की शुरुआत में एक नोट के अनुसार, बर्नस्टीन को चीनी बाजार में सुधार की उम्मीद है। उनके मुताबिक फिलहाल सभी स्थितियां भारत के पक्ष में दिखाई दे रही हैं।

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सभी विदेशी कंपनियों की पसंद बन रहा भारत

Hang Seng China Enterprises Index, हांगकांग में लिस्टेड चीनी शेयरों का एक गेज, 2023 में चार साल की रिकॉर्ड गिरावट के बाद पहले से भी लगभग 13% नीचे है। हांग कांग लगभग दो दशकों में अपने सबसे निचले स्तर की ओर बढ़ रहा है, जबकि भारत का स्टॉक बेंचमार्क रिकॉर्ड-उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहे हैं। जो विदेशी पहले चीन से प्रभावित थे, वे अपना पैसा उसके दक्षिण एशियाई प्रतिद्वंद्वी को भेज रहे हैं। लंदन स्थित थिंक-टैंक ऑफिशियल मॉनेटरी एंड फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस फोरम के हालिया स्टडी के अनुसार, ग्लोबल पेंशन और फाइनेंशियल इंस्टीट्युशन भी भारत का पक्ष लेते नजर आ रहे हैं। विदेशी फंडों ने 2023 में भारतीय शेयरों में 21 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया, जिससे देश के बेंचमार्क S&P बीएसई सेंसेक्स इंडेक्स को लगातार आठवें साल बढ़त हासिल करने में मदद मिली।

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