भारतीय बाजार का तीन साल में सबसे बुरा हाल, मार्केट कैप 8% घटा, दुनिया के 13 बाजारों के m-cap में कमी

India MCap big fall in FY26: इस वित्त वर्ष 2026 में एक से एक दिक्कतें आती रही जिसने भारतीय मार्केट को बुरी तरह झटका दिया। इस झटके में भारत का मार्केट कैप 8% गिर गया और यह 13 कमजोर मार्केट वाले देशों में शुमार हुआ तो दूसरी तरफ कुछ देश ऐसे भी रहे जिनके मार्केट कैप में 118% तक की तेजी आई। चेक करें ओवरऑल वैश्विक मार्केट की स्थिति

अपडेटेड Mar 30, 2026 पर 9:23 AM
Story continues below Advertisement
हाई वैल्यूएशन, कमाई की सुस्त ग्रोथ, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, टैरिफ वार के साथ-साथ ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही लड़ाई और कच्चे तेल के उबाल ने इस वित्त वर्ष 2026 में भारतीय मार्केट को तगड़ा शॉक दिया।

India MCap big fall in FY26: वित्त वर्ष 2026 में भारतीय स्टॉक मार्केट वैश्विक बाजारों की तुलना में कमजोर रहा। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते भारतीय कंपनियों के टोटल मार्केट कैप में तीन साल की सबसे बड़ी गिरावट आई। भारत का मार्केट कैप 8% गिरकर $4.83 ट्रिलियन यानी $4.83 लाख करोड़ से $4.5 ट्रिलियन रह गया, जो FY23 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। दुनिया भर में बात करें तो इस दौरान सिर्फ 13 बाजारों का एमकैप कम हुआ जिसमें भारत सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में 9वें स्थान पर रहा। सबसे अधिक 25% की गिरावट साइप्रस के मार्केट कैप में आई।

किन देशों के मार्केट ने दिखाया दम?

इस वित्त वर्ष भारतीय स्टॉक मार्केट का मार्केट कैप 8% कम हुआ। सबसे अधिक झटका साइप्रस को लगा जिसका मार्केट कैप 25% घटा। इसके बाद लेबनान का मार्केट कैप 21%, डेनमार्क का 15%,, अर्जेंटीना का 14%, मॉरीशस, फिलीपींस और त्रिनिदाद का करीब 13%, एस्टोनिया का 8% तो सऊदी अरब, जमैका और UAE का 1–3% कम हुआ। वहीं दूसरी तरफ दुनिया के कुछ बाजारों ने मजबूती दिखाई। सबसे अधिक मार्केट कैप दक्षिण कोरिया का बढ़ा जिसमें रिकॉर्ड 118% का उछाल दिखा। इसके बाद ताइवान के मार्केट कैप में 68%, कनाडा में 28%, चीन में 25%, जापान में 24%, हांगकांग में 22%, अमेरिका में 17%, यूनाइटेड किंगडम में 14% और जर्मनी 2% की बढ़त आई। ताइवान और कनाडा के मार्केट कैप में वित्त वर्ष 2021 के बाद से सबसे बड़ी तेजी आई।


1

भारतीय बाजारों की कमजोर की क्या है वजह?

हाई वैल्यूएशन, कमाई की सुस्त ग्रोथ, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, टैरिफ वार के साथ-साथ ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही लड़ाई और कच्चे तेल के उबाल ने भारतीय मार्केट को तगड़ा शॉक दिया। मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बड़ा रिस्क हैं क्योंकि इससे चालू खाता का घाटा और सब्सिडी का बोझ बढ़ता है जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है। ब्रोकरेज कंपनियों ने तो अब भारतीय बाजारों के लिए कमाई के अनुमान घटाने शुरू कर दिए हैं।

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ने अपने ग्रोथ अनुमान में लगभग 9% की कटौती की है जबकि ईरान-अमेरिका युद्ध से पहले कैलेंडर वर्ष CY26 के लिए 16% और CY27 के लिए 14% का था लेकिन अब इसे घटाया गया है। गोल्डमैन ने यह कटौती कच्चे तेल में तेजी, जीडीपी की सुस्त रफ्तार और रुपये की कमजोरी के चलते किया है। एक और ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने भी चेतावनी दी है कि अगर युद्ध लंबा चला तो वित्त वर्ष 2027 में 16% के ग्रोथ की उम्मीदों पर असर पड़ सकता हैप्रभावित कर सकता है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि अप्रैल-मई में कच्चा तेल प्रति बैरल औसतन $80–100 पर रह सकता है जिसके बाद जून-जुलाई में यह करीब $80 प्रति बैरल पर आ सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।