1 नवंबर को जारी एक प्राइवेट सर्वे के मुताबिक, भारत की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि अक्टूबर में बढ़कर 57.5 हो गई, जो एक महीने पहले यानी सितंबर में 9 महीने के निम्नतम स्तर 56.5 पर थी। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स लगातार दसवें महीने 55 अंक से ऊपर रहा है जो मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों मजबूत मोमेंटम का संकेत है। बता दें कि 50 से अधिक का आंकड़ा गितिविधियों में विस्तार का संकेत होता है। मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में उछाल अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। बता दें कि पिछले तीन महीनों से पीएमआई में गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि ये 50 के लेवल से ऊपर बनी हुई थी।
उत्पादन गतिविधियों में तेजी का कारण वस्तुओं की मजबूत मांग रही। सर्वे में शामिल लोगों ने कहा कि नए उत्पादों की लॉचिंग और सही मार्केटिंग रणनीति ने बिक्री बढ़ाने में मदद की। सितंबर में डेढ़ साल में सबसे कमजोर उछाल के बाद निर्यात ऑर्डर में मजबूत बढ़त दिखी है। उत्पादकों ने उपभोक्ता और निवेश वस्तुओं में तेज ग्रोथ के साथ उत्पादन बढ़ाया।
कीमतों के बारे में सर्वेक्षण से पता चला कि इनपुट महंगाई तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। हालांकि यह अपने लॉन्ग टर्म एवरेज से नीचे बनी रही। आउटपुट कीमतों में तेज बढ़ हुई जो सीरीज के ट्रेंड से आगे रही। निर्माताओं ने सितंबर की तुलना में अधिक मात्रा में अतिरिक्त कर्मचारियों को काम पर रखा। इसके अलावा, एक साल से अधिक समय में बैकलॉग में पहली बार गिरावट आई है।
मांग में सुधार के कारण खरीद में और बढ़त हुई। इस बीच, इनपुट डिलीवरी का समय लगातार आठवें महीने कम हुआ। सर्वेक्षण में प्री-प्रोडक्शन इन्वेंटरी में पर्याप्त बढ़त के संकेत मिले हैं। इसके साथ ही उत्पादक भविष्य के उत्पादन की मात्रा को लेकर अधिक आशावादी दिख रहे हैं।
30 अक्टूबर को जारी किए गए कोर डेटा में आठ कोर उद्योगों का इंडेक्स प्रदर्शित किया गया है। ये इंडेक्स इंफ्रा सेक्टर का प्रतिनिधित्व करते हैं और औद्योगिक उत्पादन के इडेक्स में 40 फीसदी वेटेज रखते हैं। इसमें पिछले महीने के 1.6 फीसदी संकुचन की तुलना में 2 फीसदी की बढ़त हुई है। हालांकि,भारत का निर्यात प्रदर्शन थोड़ा बेहतर रहा क्योंकि पहले छह महीनों में निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 1 फीसदी की बढ़त हुई है।