$5 ट्रिलियन का फिर हुआ भारतीय मार्केट, लेकिन ब्लूचिप्स की बजाय BSE को यहां से मिला अधिक सपोर्ट

$5 Trillion Market: घरेलू स्टॉक मार्केट में कुछ समय से अच्छी रौनक दिख रही है। इसका असर बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में दिखा और छह महीने के हाई पर पहुंच गया। एक बार फिर बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप $5 ट्रिलियन का हो गया। जानिए इस तेजी की वजह और भारतीय मार्केट को लेकर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है

अपडेटेड Jun 17, 2026 पर 12:31 PM
अप्रैल की शुरुआत से अब तक इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 7% मजबूत हुआ है जबकि बीएसई मिडकैप 150 में इस दौरान 16% और बीएसई स्मॉलकैप 250 में 23% की तेजी आई तो बीएसई माइक्रोकैप 250 इंडेक्स 26% ऊपर चढ़ गया।

$5 Trillion Market: बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप आज $5 ट्रिलियन यानी $5 लाख करोड़ (₹472 लाख करोड़) के पार हो गया। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बीएसई की वैल्यू छह हफ्ते के हाई पर पहुंच गई। इससे पहले बीएसई का मार्केट कैप $5 ट्रिलियन 8 मई को था। इस तेजी की मुख्य वजह पश्चिमी एशिया में शांति की उम्मीद पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट और India VIX में तेज गिरावट रही। चार कारोबारी दिनों में बीएसई का टोटल मार्केट कैप 6% से अधिक बढ़ी है, जबकि अप्रैल की शुरुआत से इसमें लगभग 14% की तेजी आई है।

ब्लूचिप स्टॉक्स की बजाय ब्रोडर मार्केट से अधिक सपोर्ट

खास बात ये है कि इसे ब्लूचिप स्टॉक्स की बजाय ब्रोडर मार्केट से अधिक सपोर्ट मिला। अप्रैल की शुरुआत से इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 7% मजबूत हुआ है जबकि बीएसई मिडकैप 150 में इस दौरान 16% और बीएसई स्मॉलकैप 250 में 23% की तेजी आई तो बीएसई माइक्रोकैप 250 इंडेक्स 26% ऊपर चढ़ गया। हालांकि इस तेजी के बावजूद बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप इस साल 2026 की शुरुआत से 5.5% और सितंबर 2024 में $5.7 ट्रिलियन के रिकॉर्ड हाई से 13% नीचे है।


क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?

मार्केट के कुछ जानकारों का कहना है कि भारत में पिछले दशक में किए गए सुधारों का असर अब कॉरपोरेट बैलेंस शीट, फॉर्मलाइजेशन के ट्रेंड और कमाई में बढ़ोतरी के तौर पर दिखने लगा है। टॉप 500 लिस्टेड नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों के कॉर्पोरेट कैपेक्स में बढ़ोतरी से भी भारतीय कॉर्पोरेट जगत की मजबूती साफ दिखती है। कोरोना महामारी से पहले के स्तर की तुलना में यह खर्च लगभग दोगुना होकर करीब ₹10 लाख करोड़ हो गया है। साथ ही बैलेंस शीट भी काफी मज़बूत हुई हैं, नेट डेट-टू-इक्विटी रेश्यो कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है और ऑपरेटिंग कैश फ्लो भी अच्छा बना हुआ है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन वजहों से कॉरपोरेट इंडिया निवेश बढ़ाने और कमाई में बढ़ोतरी के अगले दौर को आगे बढ़ाने की स्थिति में है।

फिलिपकैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच सौदा भारतीय मैक्रो-इकोनॉमी के साथ-साथ इक्विटी, बॉन्ड और करेंसी जैसे सभी एसेट क्लास के लिए बेहतर साबित होगा। इन पर महंगाई का दबाव, मांग को लेकर अनिश्चितता, कमाई का रिस्क और विदेशी पूंजी की निकासी का असर पड़ रहा था। फिलिपकैपिटल के मुताबिक पहले अमेरिका और ईरान के बीच जल्द सुलह की उम्मीद थी यह लंबा खिंच गया, जिससे इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही और पूरे साल की ग्रोथ की रफ्तार पर असर पड़ा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लंबा खिंचता है और कमोडिटी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय कंपनियों की कमाई और मैक्रो-इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ेगा तो ऐसे में इक्विटी को लेकर नजरिया मौजूदा स्तर से बदलकर न्यूट्रल या सतर्कता वाला हो जाएगा।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेश ने भारतीय मार्केट को मज़बूत बनाए रखा है लेकिन पिछले दो वर्षों से यह एक दायरे में ही घूम रही है। भारतीय मार्केट के लिए विदेशी पूंजी का आउटलुक अनिश्चित और कमजोर बना हुआ है और इसमें किसी भी बदलाव पर मार्केट की बारीकी से नजर रहेगी। फिलिपकैपिटकल के मुताबिक इस पर रुपये की चाल, डेट कैपिटल फ्लो को आकर्षित करने के लिए सरकार के तरीके और इक्विटी वैल्यूएशन में सुधार जैसे फैक्टर्स का असर दिखेगा।

मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के सीईओ गौरव भंडारी का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते लार्ज-कैप सेक्टर में जो गिरावट आई, वह असल फंडामेंटल की तुलना में ज्यादा तेज रही। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि बैंकिंग शेयरों, टेलीकॉम कंपनियों और लार्ज-कैप IT में धीरे-धीरे सुधार से मार्केट रिकवर होगा। मोनार्क कैपिटल कुछ स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों को लेकर और भी पॉजिटिव है, क्योंकि पिछले 18 महीनों में टाइम करेक्शन, कमाई में उछाल और वैल्यूएशन के सामान्य होने से इनमें आकर्षक मौके बने हैं।

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