India-US trade deal : भारत-अमेरिका ट्रेड डील उम्मीद के मुताबिक, ब्रोकरेज से जानिए बाजार पर क्या होगा इसका असर

India-US trade deal : भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ है। इससे व्यापक समझौते का रास्ता साफ हुआ है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाकर 18% कर दिया जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ी है। नए व्यापार ढांचे के तहत संवेदनशील एग्री सेक्टर सुरक्षित रहेगा

अपडेटेड Feb 07, 2026 पर 1:12 PM
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India-US trade deal: इस डील से इक्विटी मार्केट को शायद तुरंत कोई ट्रिगर न मिले लेकिन मार्केट सेंटीमेंट पर इसका पॉजिटिव असर देखने को मिलेगा

India-US trade deal : भारत और अमेरिका एक आपसी और फायदेमंद ट्रेड के लिए एक अंतरिम समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमत हो गए हैं। इसे एक व्यापक अमेरिका इंडिया द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। 3 फरवरी को ट्रेड डील की घोषणा के बाद, भारतीय बाज़ार इस समझौते की बारीक डिटेल्स का इंतज़ार कर रहे थे जो उम्मीद के मुताबिक ही रहे हैं। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारतीय सामानों पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ भी हटा दिया है। इसके अलावा,टैरिफ को कुल मिलाकर 18 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है।

इन्वेस्टर्स ने टैरिफ में राहत की उम्मीदों को काफी हद तक पहले ही पचा लिया। बार्कलेज़ का मानना ​​है कि मार्केट्स ने शायद उम्मीद के मुताबिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के अच्छे असर को पहले ही पचा लिया। इस बड़ी टैरिफ कटौती ने इक्विटी मार्केट के दबाव को खत्म कर दिया है अब एक ठोस सपोर्ट के रूप में काम कर रही है।

यह समझौता EU, UK, UAE और ऑस्ट्रेलिया के साथ हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के साथ मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था के ग्रोथ की संभावना को और बेहतर बनाता है। अमेरिकी टैरिफ में कटौत, एक्सपोर्ट ओरिएंटेड और लेबर-इंटेंसिव सेक्टर के लिए लगातार पॉलिसी सपोर्ट के साथ ही बढ़ते FTA नेटवर्क से मीडियम टर्म में एक्सपोर्ट ग्रोथ को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेश आकर्षित होने और करेंसी में स्थिरता लाने में भी मदद मिलेगी। हालांकि,पिछले एक साल में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 5.4 प्रतिशत की गिरावट से इस पॉजिटिव असर में कुछ कमी आई है।


एक्सपोर्ट पर फोकस करने वाले सेक्टर्स को ज़्यादा फ़ायदा

इस डील से एक्सपोर्ट पर फोकस करने वाले सेक्टर्स को ज़्यादा फ़ायदा होगा। नोमुरा का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ़ को घटाकर लगभग 18 प्रतिशत करने से लेबर-इंटेंसिव एक्सपोर्ट सेगमेंट्स पर दबाव कम होगा। ब्रोकरेज को टैरिफ़ में कमी के बाद पॉलिसी में किसी भी बदलाव की उम्मीद नहीं है। उसका कहना है कि भारतीय एक्सपोर्टर अब दक्षिण पूर्व एशिया के अपने कॉम्पिटिटर्स के बराबर हो गए हैं। इससे खिलौने और फर्नीचर जैसे प्रोडक्ट्स का ट्रेड जो पहले वियतनाम जैसे देशों में जा रहा था,अब वापस भारत आने की संभावना है।

 मार्केट सेंटीमेंट पर होगा पॉजिटिव असर

इस डील से इक्विटी मार्केट को शायद तुरंत कोई ट्रिगर न मिले लेकिन मार्केट सेंटीमेंट पर इसका पॉजिटिव असर देखने को मिलेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ट्रेड डील इक्विटी मार्केट को एक अच्छा सेंटीमेंट बूस्ट दे सकती है। हालांकि,एक टिकाऊ और बड़े पैमाने की मार्केट रिकवरी के लिए अर्निंग में भी सुधार की ज़रूरत होगी।

एनालिस्ट्स का यह भी मानना ​​है कि भारत के लिए कृषि जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील सेक्टर्स को खोलना मुश्किल था,जो अब तक संरक्षित रहे हैं। नोमुरा का कहना है कि बड़े टैरिफ रियायतों के बावजूद भारत इन संवेदनशील बाजारों की रक्षा करने में सफल रहा है।

मार्केट एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि एग्रीकल्चर सेक्टर में किसी भी तरह के लिबरलाइजेशन से देश में निगेटिव असर हो सकते हैं। आयोनिक एसेट में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स की हेड अंकिता पाठक ने कहा,"एग्रीकल्चर को बहुत कम या ज़ीरो टैरिफ पर ज़्यादा इंपोर्ट के लिए खोलने से किसानों की इनकम पर बुरा असर पड़ सकता है। इस डील के नतीजे एग्जीक्यूशन और भविष्य की ट्रेड शर्तों में स्थिरता पर निर्भर करेंगे।"

 

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