भारत सहित दुनिया के तमाम कोयले के आयातक देश अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूती देने और इस जीवांस ईंधन के इंपोर्ट पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन में बढ़ोतरी करेंगे। Moody's के इन्वेस्टर सर्विसेस ने मंगलवार को जारी अपने नोट में यह बाते कही है।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने हाल ही में CIL को देश में बिजली बनाने वाली कंपनियों की जरुरत को पूरा करने और बफर स्टॉक बनाने के लिए आपातकालीन उपाय के तौर पर कोयले के आयात की मंजूरी दी है।
मूडीज की इन्वेस्टर सर्विस ने अपने इस नोट में कहा है कि भारत और चीन जैसे दुनिया के बड़े कोयला आयातक देश आयातीत कोयले पर अपनी निर्भरता घटाने और एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूती देने के लिए अपने घरेलू कोयला उत्पादन में बढ़ोतरी करेंगे।
मार्च 2022 में चीन के कोयला उत्पादन में 15 फीसदी की बढ़ोतरी भी देखने को मिली है। मूडीज ने यह भी बताया है कि कोल इंडिया ने भी वर्तमान वित्त वर्ष में अपने कोयला उत्पादन में लगभग 12 फीसदी की बढ़ोतरी का लक्ष्य तय किया है।
कोल इंडिया का भारत के कुल कोयला उत्पादन में 80 फीसदी योगदान है। मूडीज के इन्वेस्टर सर्विसेस का कहना है कि आगे मेटालॉजिकल और थर्मलकोल में तेजी बनी रहनी की संभावना है। हालांकि हाल के हाई से इनमें कुछ नरमी देखने को मिल सकती है।
मूडीज ने अपने इस रिपोर्ट में आगे कहा है कि कोयले की सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें कम हो रही है। कॉपर, जिंक, निकेल और एल्यूमीनियम की कीमतों से इंवेट्री घटने और रूस -यूक्रेन संघर्ष के कारण सप्लाई से जुड़ी परेशानियों के और संकेत कर रही है। इस नोट में यह भी कहा गया है कि पूर्वी यूरोप में सैन्य संघर्ष शुरु होने के पहले ही सप्लाई में दिक्कतें थी। आगे भी यह दिक्कत कायम रह सकती है।
मूडीज ने अपने इस नोट में यह भी कहा है कि पैनिक बाईंग में आई गिरावट सप्लाई की दिक्कतों के कारण ग्लोबल डिमांड में कमी, कोविड के कारण लागू लॉकडाउन के चलते चीन की खपत में गिरावट , उत्पादन लागत पर महंगाई के दबाव, और उच्च ब्याज दरें सेटीमेंट और इकोनॉमी ग्रोथ पर अपना असर दिखा रही है। इसकी वजह से स्टील और कच्चे माल की कीमतों में भी नरमी आती नजर आ रही है।