बढ़ती ब्याज दरों की चिंताओं को धता बताते हुए भारतीय बाजारों ने अप्रैल में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। अप्रैल में भारतीय बाजारों का ये प्रदर्शन बाजार जानकारों के लिए एक सुखद आश्चर्य रहा। इस अवधि में आए मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़ों की मजबूती और वैल्यूएशन में कमी के चलते बाजार के प्रदर्शन में मजबूती रही। इनकी वजह से अप्रैल में भारतीय इक्विटी मार्केट में 1.13 अरब डाॉलर का निवेश आता दिखा। नतीजतन, बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी अप्रैल महीने दुनिया के तमाम बड़े बाजारों की तुलना में सबसे बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के दीपक जसानी की राय
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में रिटेल रिसर्च के प्रमुख दीपक जसानी का कहना है कि जहां तक एफपीआई फ्लो का संबंध है तो यह अप्रैल 2023 में भारत के पक्ष में रहा। ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की उम्मीद के बीच ग्लोबल निवेशकों की जोखिम लेनी की इच्छा में बढ़त और भारत के उम्मीद से बेहतर मैक्रो इकोनॉमिक आंकड़ों ने बाजार को सपोर्ट दिया है।
FII ने इंडियन इक्विटी मार्केट में 1.13 अरब डॉलर की खरीदारी की
अप्रैल में, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इंडियन इक्विटी मार्केट में लगभग 1.13 अरब डॉलर की खरीदारी की है। यह लगातार दूसरा महीना था जब एफआईआई ने खरीदारी की है। बता दें कि फरवरी 2023 के अंत तक एफआईआई की नेट बिक्री 4.3 अरब डॉलर से घटकर 1.83 अरब डॉलर रह गई है।
अप्रैल महीने में सेंसेक्स और निफ्टी में 3.6 फीसदी और 4.06 फीसदी की बढ़त
अप्रैल महीने में सेंसेक्स और निफ्टी में 3.6 फीसदी और 4.06 फीसदी की बढ़त हुई है। इसकी तुलना में दूसरे ग्लोबल बाजारों जैसे कि एसएंडपी 500 में 1.46 फीसदी, नैस्डैक कंपोजिट में 0.04 फीसदी, सीएसी में 2.31 फीसदी, डैक्स में 1.88 फीसदी, कोस्पी में 1 फीसदी, निक्केई 225 में 3 फीसदी, शंघाई कंपोजिट में 1.5 फीसदी और एफटीएसई 100 में 3.13 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। इसी तरह डाओ जोंस और इबोवेस्पा में 2.5 फीसदी की तेजी रही है। वहीं, ताइवान और हैंग सेंग क्रमशः 1.8 फीसदी और 2.5 फीसदी गिरे हैं।
जानिए क्या रही तेजी की वजह
रिटेल महंगाई में गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर रोक से बाजार के सेंटीमेंट में सुधार आया है। इसके साथ ही देश के सर्विस सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में भी तेजी देखने को मिली है। इसका बाजार पर पॉजिटिव असर देखने को मिला है। एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) की तरफ से 3 मई को जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के सर्विसेज सेक्टर (सेवा क्षेत्र) में अप्रैल में उछाल आया है। अप्रैल में भारत के सर्विसेज सेक्टर का परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मार्च के 57.8 से बढ़कर 62.0 पर आ गया है। ये लेवल पिछले 13 सालों का हाइएस्ट लेवल है। अप्रैल महीने में भारत की सर्विसेज लगातार 21 महीने 50 के ऊपर रही है।
सर्विसेज पीएमआई डेटा शनिवार को आए अप्रैल मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई के आंकडों के बाद आया है। अप्रैल महीने में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई भी 57.2 के उच्च स्तर पर रहा है। इसके चलते अप्रैल में देश की कंपोजिट पीएमआई मार्च के 58.4 से बढ़कर 61.6 के स्तर पर आ गई है। बता दें कि कंपोजिट पीएमआई, सर्विसेज पीएमआई और मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई का कॉम्बिनेशन होता है। अप्रैल का कंपोजिट पीएमआई जुलाई 2010 के बाद के सबसे हाइएस्ट लेवल पर रहा है।
सरकार ने अप्रैल में 1.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड तोड़ जीएसटी कलेक्शन किया है। यह राशि एक साल पहले एकत्र किए गए 1.68 लाख करोड़ रुपये के पिछले रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी ज्यादा है।
इक्विटी में चीन को सबसे ज्यादा 48.19 अरब डॉलर का विदेशी निवेश मिला
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अब तक इक्विटी में चीन को सबसे ज्यादा 48.19 अरब डॉलर का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है। जापान और इंडोनेशिया क्रमशः 13.96 बिलियन डॉलर और 11.27 बिलियन डॉलर के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे हैं। दूसरी विदेशी संस्थागत निवेशक लगभग 40.74 अरब डॉलर की बिक्री के साथ अमेरिका में नेट सेलर बने हुए हैं। इसके अलावा थाईलैंड में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1.88 अरब डॉलर की बिक्री की है। वहीं, फिलीपींस और मलेशिया में FII ने इक्विटी मार्केट में लगभग 50 करोड़ डॉलर की बिक्री की है।
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