Indian rupee vs Pakistani rupee: भारतीय रुपया इन दिनों अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और डॉलर की मजबूती की वजह से रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
Indian rupee vs Pakistani rupee: भारतीय रुपया इन दिनों अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और डॉलर की मजबूती की वजह से रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.53 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि इसके बावजूद भारतीय रुपया अभी भी पाकिस्तानी करेंसी के मुकाबले काफी मजबूत बना हुआ है।
भारतीय रुपये और पाकिस्तानी रुपये में कितना फर्क?
ताजा करेंसी एक्सचेंज रेट के मुताबिक, 1 भारतीय रुपया करीब 2.89 पाकिस्तानी रुपये के बराबर है। वहीं 1 पाकिस्तानी रुपया करीब 35 पैसे भारतीय रुपये के बराबर बैठता है
अगर आसान भाषा में समझें, तो भारत के 100 रुपये पाकिस्तान में करीब 290 पाकिस्तानी रुपये के बराबर बैठते हैं। इसका मतलब है कि भारतीय रुपया अभी भी पाकिस्तानी करेंसी से लगभग तीन गुना ज्यादा मजबूत है।
आजादी के समय क्या स्थिति थी?
भारतीय रुपया आजादी के समय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी मजबूत माना जाता था। साल 1947 में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 4.76 भारतीय रुपये थी। उस दौर में भारतीय रुपया ब्रिटिश पाउंड से जुड़ी फिक्स्ड एक्सचेंज रेट व्यवस्था के तहत चलता था। इसलिए इसकी वैल्यू काफी स्थिर मानी जाती थी।
शुरुआती वर्षों में पाकिस्तानी रुपया भी भारतीय रुपये के लगभग बराबर ही था। हालांकि 1948 से 1955 के बीच 1 अमेरिकी डॉलर करीब 3.31 पाकिस्तानी रुपये के बराबर पहुंच गया था। इसके पीछे एक बड़ा कारण 1949 में ब्रिटिश पाउंड की वैल्यू घटाना थी। उस समय भारत ने अपनी करेंसी की वैल्यू भी एडजस्ट कर दी थी, लेकिन पाकिस्तान ने कुछ समय तक ऐसा नहीं किया। इसी वजह से कुछ वर्षों के लिए पाकिस्तानी रुपया डॉलर के मुकाबले ज्यादा मजबूत दिखने लगा था।
1955 के बाद अलग दिशा में बढ़े दोनों देश
1955 में पाकिस्तान ने भी अपनी करेंसी डी-वैल्यू कर दी। इससे भारतीय रुपया और पाकिस्तानी रुपया फिर लगभग बराबरी के स्तर पर आ गए। लेकिन इसके बाद दोनों देशों की अर्थव्यवस्था अलग-अलग दिशा में बढ़ने लगी।
भारत में धीरे-धीरे इकोनॉमी का आकार बढ़ता गया। विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ, आईटी, सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से विकसित हुए और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। वहीं पाकिस्तान लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता, विदेशी कर्ज, ऊंची महंगाई और कमजोर विदेशी मुद्रा भंडार जैसी समस्याओं से जूझता रहा। इसका सीधा असर वहां की करेंसी पर पड़ा और समय के साथ पाकिस्तानी रुपया भारतीय रुपये के मुकाबले लगातार कमजोर होता चला गया।
दोनों देशों की करेंसी में इतना अंतर क्यों?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक किसी देश की करेंसी की ताकत सिर्फ नोट की कीमत से तय नहीं होती। इसके पीछे देश की अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा भंडार, महंगाई, व्यापार घाटा और निवेशकों का भरोसा जैसे कई बड़े कारण होते हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान के मुकाबले काफी बड़ी है। भारत के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, बड़ा घरेलू बाजार और अपेक्षाकृत स्थिर निवेश माहौल है। दूसरी तरफ पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट, ऊंची महंगाई, विदेशी कर्ज और कमजोर विदेशी मुद्रा भंडार जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। इसका असर वहां की करेंसी पर भी पड़ा है।
फिर भारतीय रुपये को लेकर चिंता क्यों?
भारतीय रुपया पाकिस्तानी करेंसी से मजबूत है, लेकिन फिलहाल चिंता इसकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी को लेकर है। भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और वैश्विक अनिश्चितता की वजह से भी निवेशक डॉलर की तरफ जा रहे हैं, जिससे रुपये पर असर पड़ रहा है।
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