ट्रंप के रेसिप्रोकल टैक्स से इन भारतीय कंपनियों का घट जाएगा मुनाफा, शेयरों पर भी हो सकता है असर: Citi

भारत में अभी ऑर्गेनिक और मिसलेनियश केमिकल्स पर 10% टैरिफ है, जबकि अमेरिका में इसका औसत केवल 3% है। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोप को होने वाले प्रमुख एक्सपोर्ट पर औसत टैरिफ 5-6% है। Citi ने कहा कि ऐसे में अगर अमेरिका इन भारतीय एक्सपोर्ट पर 7% का टैरिफ लगाता है, तो स्पेशिऐलिटी केमिकल कंपनियों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में कमी आ सकता है

अपडेटेड Feb 19, 2025 पर 12:26 PM
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Citi ने कहा कि PI इंडस्ट्रीज के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 12 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 'रेसिप्रोकल टैक्स' यानी 'जैसे को तैसा टैक्स' लगाने का ऐलान किया है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म सिटी रिसर्च का कहना है कि इस रेसिप्रोकल टैक्स को लगाए जाने से भारत की स्पेशिऐलिटी केमिकल कंपनी को झटका लग सकता है और उनके मुनाफे में कमी आ सकती है। अभी भारत में ऑर्गेनिक और मिसलेनियश केमिकल्स पर 10% टैरिफ है, जबकि अमेरिका में इसका औसत केवल 3% है। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोप को होने वाले प्रमुख एक्सपोर्ट पर औसत टैरिफ 5-6% है।

Citi ने कहा कि ऐसे में अगर अमेरिका इन भारतीय एक्सपोर्ट पर 7% का टैरिफ लगाता है, तो स्पेशिऐलिटी केमिकल कंपनियों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में कमी आ सकता है। ब्रोकरेज ने कहा कि उसे PI इंडस्ट्रीज के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 12 प्रतिशत, नवीन फ्लोरीन में 5 प्रतिशत और SRF में 4 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है।

हालांकि, Citi ने साथ में यह भी कहा कि इस टैरिफ का वास्तविक असर इसकी तुलना में कम भी हो सकता है। ब्रोकरेज ने इसके पीछे कुछ संभावित कारण बताए। सिटी ने कहा कि दूसरे देशों के एक्सपोर्टरों पर भी टैरिफ लग सकता है, जिससे भारतीय कंपनियों को आंशिक राहत मिल सकती है। साथ ही अमेरिकी बाजार में टैरिफ से कीमतें बढ़ने की संभावना है, जिससे भारतीय कंपनियां अपने दाम बढ़ाकर नुकसान की भरपाई कर सकती हैं।


आज सुबह 9:30 बजे, PI इंडस्ट्रीज का शेयर 1.3 प्रतिशत गिरकर 3,124 रुपये पर कारोबार कर रहा था। नवीन फ्लोरीन का शेयर 1 प्रतिशत गिरकर 4,045.8 रुपये पर था। वहीं SRF के शेयर अपने पिछले बंद भाव की तुलना में 0.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,735.9 रुपये पर कारोबार कर रहे थे।

क्या भारत को नए बाजार मिल सकते हैं?

दूसरी ओर ब्रोकरेज फर्म नुवामा इंस्टीट्यूशल इक्विटीज का माना है कि भारत अब यूरोपीय केमिकल मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार कर रह सकता है। हालांकि, यह टैरिफ यूरोप के केमिकल एक्सपोर्ट्स के लिए भी अवसर पैदा कर रहा हैं, खासकर उनके लिए जिनके पास लागत के मोर्च पर बढ़त है। लेकिन यूरोप के बाजार में कुछ और भी समस्याएं है। यूरोप की केमिकल इंडस्ट्री को इस समय घरेलू मांग में गिरावट और चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

नुवामा ने कहा, "इससे भारत के छोटे-मॉलेक्यूल वाले फार्मास्युटिकल रिसर्च इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल सकता है, जो यूरोप में बदलते समीकरण का लाभ उछा रही है। साथ ही भारत का एग्रोकेमिकल्स भी यूरोप में गति पकड़ रहा है और यूरोपीय नियामक नीति अब भारतीय निर्यातकों के पक्ष में जाती दिख रही हैं।"

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