शेयर बाजार में चल रहा 'कैपिटुलेशन' का दौर, क्या डर के इस साये में छिपी है अगली बड़ी तेजी? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Indian Stock Market: रिपोर्ट के मुताबिक, जब 70% से अधिक शेयर अपने 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे गिर जाते हैं, तो यह बाजार में अत्यधिक तनाव का संकेत होता है। 8 अप्रैल को यह आंकड़ा 71.3% पर पहुंच गया, जिसका मतलब है कि बाजार अब 'कैपिटुलेशन जोन' में है

अपडेटेड Apr 12, 2026 पर 3:43 PM
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रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में आई यह गिरावट दरअसल एक शानदार रिकवरी का संकेत है

Market News: मिडिल ईस्ट के संघर्ष और व्यापारिक बाधाओं के कारण पिछले कुछ हफ्तों से भारतीय शेयर बाजार किसी रोलरकोस्टर राइड जैसा रहा है। कई शेयर बुरी तरह टूट चुके हैं और निवेशकों में घबराहट है। लेकिन Vallum Capital की ताजा रिपोर्ट एक अलग और पॉजिटिव कहानी बयां कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में आई यह गिरावट दरअसल एक शानदार रिकवरी का संकेत है।

क्या है 'कपटुलेशन जोन' और क्यों है यह खास?

बाजार की भाषा में 'कैपिटुलेशन' (Capitulation) उस स्थिति को कहते हैं जब निवेशक डर के मारे अपनी होल्डिंग सरेंडर कर देते हैं और फंडामेंटल्स को भूल जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जब 70% से अधिक शेयर अपने 200-दिवसीय मूविंग एवरेज (DMA) से नीचे गिर जाते हैं, तो यह बाजार में अत्यधिक तनाव का संकेत होता है। 8 अप्रैल को यह आंकड़ा 71.3% पर पहुंच गया, जिसका मतलब है कि बाजार अब 'कैपिटुलेशन जोन' में है। इतिहास गवाह है कि यह स्तर खरीदारी के लिए सबसे बेहतरीन मौका होता है। इस स्तर से अगले 1 साल का औसत रिटर्न लगभग 17.5% रहा है।


कच्चे तेल की कीमतों में 'सुपरफास्ट' सुधार

आमतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए झटकों को स्थिर होने में करीब 30 हफ्ते लगते हैं। लेकिन इस बार यह चमत्कार केवल 9 हफ्तों में हो गया। रिपोर्ट कहती है कि ऊर्जा की कीमतों में इतनी तेजी से सुधार होना पूरे बाजार की स्थिरता के लिए एक बहुत बड़ा और पॉजिटिव सिग्नल है।

वहीं पिछले कुछ समय में भारतीय बाजारों का अन्य इमर्जिंग मार्केट्स की तुलना में जो प्रीमियम था, वह अब काफी कम हो गया है। वेलम कैपिटल के अनुसार, भारतीय शेयर अब तुलनात्मक रूप से काफी सस्ते हो गए हैं, जिससे निवेशकों को सही कीमत पर अच्छी कंपनियां चुनने का मौका मिल रहा है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

रिपोर्ट का मानना है कि अक्सर बड़े सुधार संकट की कोख से ही जन्म लेते हैं। मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्ष ने भारत के रक्षा क्षेत्र में नई जान फूंक दी है। भारत ने रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड बनाया है और इस सेक्टर में निवेश की एक लंबी पाइपलाइन तैयार है। जो क्षेत्र इस संकट में टिके रहे हैं, वे अगली तेजी के लीडर बनेंगे।

वेलम कैपिटल के अनुसार, बाजार अक्सर दो साल तक 'टाइम-करेक्शन' में रहता है ताकि तीसरे साल में एक बड़ा और केंद्रित रिवॉर्ड दे सके। अब डर का सबसे बुरा दौर खत्म हो रहा है। निवेशकों को अब युद्ध के जोखिमों के बजाय अगली पारी की तैयारी करनी चाहिए। निवेशकों को उन क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए जिन्होंने इस उथल-पुथल में मजबूती दिखाई है, जैसे कि डिफेंस और अन्य स्ट्रक्चरल सेक्टर्स।

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