AMC के सीईओ-सीआईओ को कितनी सैलरी, नहीं चलेगा पता, SEBI ने पेश किया प्रस्ताव

किसी AMC (एसेट मैनेजमेंट कंपनी) के सीईओ, सीआईओ और सीटीओ समेत कुछ एंप्लॉयीज के सैलरी का सार्वजनिक तौर पर खुलासा करना होता है। हालांकि अब सेबी ने एक प्रस्ताव पेश किया है जिसमें यह बंद हो सकता है यानी कि इन्हें कितनी सैलरी मिल रही है, इसकी जानकारी मिलनी बंद हो जाएगी। जानिए सेबी ने यह प्रस्ताव पेश क्यों किया है और अभी क्या नियम है

अपडेटेड Jun 10, 2026 पर 2:19 PM
एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को अपनी वेबसाइट पर सीईओ, सीआईओ और सीओओ के नाम, पद और सैलरी की जानकारी देनी होती है। साथ ही सबसे अधिक सैलरी पाने वाले टॉप 10 एंप्लॉयीज और उन सभी एंप्लॉयीज की जानकारी भी देनी होती है जिनकी सालाना सैलरी ₹1.02 करोड़ से ज्यादा है। अब SEBI ने इसमें बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है।

बाजार नियामक SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने प्रस्ताव दिया है कि एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) में सीनियर अधिकारियों की अलग-अलग यानी इंडिविजु्अल सैलरी का खुलासा करने की बजाय इसे मिलाकर एक में ही किया जाए। अगर ऐसा होता है तो फंड हाउस को सीईओ (CEO), सीआईओ (CIO) और सीओओ (COO) की सैलरी को अलग-अलग नहीं बताना होगा बल्कि इन्हें कुल मिलाकर कितना वेतन दिया गया, इसकी जानकारी देनी होगी। प्रस्ताव के मुताबिक फंड हाउस को टॉप लेवल की कैटेगरीज में कुल वेतन और अलग-अलग कैटेगरीज में एंप्लॉयीज की संख्या का खुलासा करना होगा। इसे लेकर सेबी ने आज बुधवार 10 जून को कंसल्टेशन पेपर जारी किया और इस पर 30 जून 2026 तक पब्लिक कमेंट्स मंगाए हैं।

अभी क्या है नियम

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को अपनी वेबसाइट पर सीईओ, सीआईओ और सीओओ के नाम, पद और सैलरी की जानकारी देनी होती है। साथ ही सबसे अधिक सैलरी पाने वाले टॉप 10 एंप्लॉयीज और उन सभी एंप्लॉयीज की जानकारी भी देनी होती है जिनकी सालाना सैलरी ₹1.02 करोड़ से ज्यादा है। इसमें एंप्लॉयीज की मीडियन सैलरी और सीईओ की सैलरी के बीच के अनुपात और मैनेजमेंट के तहत एसेट्स (AUM) से जुड़ी जानकारी भी शामिल होती है।

अब SEBI ने क्यों पेश किया बदलाव का प्रस्ताव


सेबी का कहना है कि प्रस्ताव का उद्देश्य निवेशकों के हितों, प्राइवेसी और जानकारी के खुलासे के के बीच संतुलन बनाते हुए सही मायने में पारदर्शिता बढ़ाना है। सेबी ने डेटा एनालिसिस के मुताबिक मौजूदा सैलरी डिस्क्लोजर फ्रेमवर्क के तहत आने वाले एंप्लॉयीज अधिकतर AMC में कुल वर्कफोर्स का बहुत छोटा हिस्सा होते हैं, आमतौर पर कुल एंप्लॉयीज के 2% से 10% के बीच। सेबी के मुताबिक AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) समेत इंडस्ट्री के कई लोगों ने मौजूदा फ्रेमवर्क के दायरे और डिटेल लेवल को लेकर चिंता जताई है।

म्यूचुअल फंड बॉडी AMFI का कहना है कि किसी व्यक्ति की सैलरी का नाम के साथ सार्वजनिक रूप से खुलासा करने से उनकी प्राइवेसी को खतरा हो सकता है और म्यूचुअल फंड्स को पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स जैसे सेक्टर के मुकाबले कॉम्पटीशन में नुकसान हो सकता है, जहां ऐसी जानकारी देने का नियम नहीं है। इसके अलावा सेबी का कहना है कि इंडस्ट्री से जो फीडबैक मिला, उसके मुताबिक ऐसी जानकारी देने से निवेशकों को कोई फायदा भी नहीं होता है बल्कि म्यूचुअल फंड एंप्लॉयीज की प्राइवेसी को खतरा होता है।

वैसे सेबी ने अपने प्रस्ताव फंड मैनेजर की सैलरी के लिए एक अलग डिस्क्लोजर सिस्टम लाने की बात कही गई है। अभी ऐसी सैलरी का अलग से खुलासा नहीं किया जाता है, लेकिन सेबी ने सुझाव दिया है कि संबंधित स्कीम में निवेश करने वाले निवेशकों के अनुरोध पर फंड मैनेजर की स्कीम-लेवल की कुल सैलरी की जानकारी दी जा सकती है। यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होगी और सिर्फ उन्हीं स्कीम तक सीमित होगी जिनमें अनुरोध करने वाले निवेशक के पास यूनिट्स हैं।

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