मेटल कंपनियों के शेयर गिर रहे हैं। निफ्टी मेटल इंडेक्स 6,825 अंक के अपने 52 हफ्ते के हाई से 34 फीसदी गिर चुका है। यह 2021 के बाद से अपने सबसे लो लेवल के करीब पहुंच गया है। इस साल BSE मेटल इंडेक्स में भी 19 फीसदी गिरावट आई है।
मेटल कंपनियों के शेयर गिर रहे हैं। निफ्टी मेटल इंडेक्स 6,825 अंक के अपने 52 हफ्ते के हाई से 34 फीसदी गिर चुका है। यह 2021 के बाद से अपने सबसे लो लेवल के करीब पहुंच गया है। इस साल BSE मेटल इंडेक्स में भी 19 फीसदी गिरावट आई है।
यूक्रेन क्राइसिस के चलते मेटल स्टॉक्स में तेजी आई थी। अप्रैल की शुरुआत में प्राइसेज रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। उसके बाद से प्राइसेज दबाव में दिख रहे हैं। कोरोना के मामले फिर से बढ़ने और चीन में सुस्ती इसकी वजहें हैं।
ग्रीन पोर्टफोलियो के फाउंडर दिवम शर्मा ने कहा, "मेटल इंडेक्स में गिरावट की वजह इनफ्लेशन को काबू में करने की कोशिशें हैं। इंडिया और दूसरे देशों में केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट्स बढ़ा रहे हैं।" ज्यादा गिरावट स्टील जैसे फेरस मेटल कंपनियों के शेयरों में दिखी है। इसकी वजह इंडिया से एक्सपोर्ट पर लगी एक्सपोर्ट ड्यूटी है।
सरकार ने 22 मई से एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने का ऐलान कर स्टील इंडस्ट्री को चौंका दिया था। सभी ग्रेड के आयरन ओर पर 50 फीसदी ड्यूटी लगाई गई है। पेलेट्स पर 45 फीसदी और सेमी-फिनिश्ड स्टील को छोड़ नॉन-अलॉय स्टील पर 15 फीसदी लगाई गई है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की एवीपी (रिसर्च-ब्रोकिंग एंड डिस्ट्रिब्यूशन) स्नेहा पोद्दार ने कहा, "सरकार ने घरेलू बाजार में स्टील की कीमतों में कमी लाने के लिए स्टील पर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई है। इसका असर एक हफ्ते के अंदर दिखा। सभी तरह के स्टील के प्राइसेज मे गिरावट आई।"
डेटा से पता चलता है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी का स्टील के घरेलू प्राइसेज पर निगेटिव असर पड़ा रहा है, क्योंकि 17 जून को खत्म हफ्ते में लगातार दसवें हफ्ते स्टील प्राइसेज में गिरावट आई है। इनवेंट्री बढ़ने और रिटेल सेल्स में गिरावट के बावजूद एक्सपोर्ट ड्यूटी में अब तक कमी नहीं की गई है। हालांकि, घरेलू स्टील कंपनियों को उम्मीद की एक किरण दिखी है।
एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ने का असर कुछ हद तक कोकिंग कोल और आयरन ओर के प्राइसेज में कमी की वजह से कम हुआ है। इसलिए कीमतों में गिरावट के बावजूद स्प्रेड बढ़ा है।
ब्रोकरेज फर्म एडलवाइज रिसर्च के मुताबिक, हॉट-रोल्ड कॉयल (HRC) प्राइस में हफ्ते दर हफ्ते 1,500 रुपये प्रति टन की गिरावट आई है। इसका एवरेज प्राइस 61,400 रुपये प्रति टन आ गया है। एडलवाइज की रिपोर्ट में कहा गया है, "हमारे रिसर्च से यह पता चला है कि रिटेल बायर्स अभी खरीदारी नहीं करना चाहते। वे कोकिंग कोल के प्राइसेज में कमी से स्टील की कीमतों में और कमी का इंतजार कर रहे हैं। एचआरसी के डोमेस्टिक प्राइसेज पहले ही 14 फीसदी यानी 9,350 रुपये प्रति टन घट चुका है।"
एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टील इंडस्ट्री के सामने कई तरह के चैलेंजेज हैं। इस वजह से मेटल सेक्टर की तस्वीर बहुत उत्साहजनक नहीं लगती। ग्रीन पोर्टफोलियो के शर्मा ने कहा, "मेटल कंपनियां उस तरह का प्रॉफिट कमाने नहीं जा रही हैं, जैसा उन्होंने फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में कमाया था। प्राइसेज पर दबाव बना रहेगा, जबिक इनपुट प्राइसेज ऊंचे लेवल पर बने रहेंगे।"
मोतीलाल ओसवाल के पोद्दार ने इनवेस्टर्स को मेटल शेयरों से बाहर निकलने की सलाह दी है। हालात सुधरने के बाद इनवेस्टर्स फिर से इन शेयरों में निवेश कर सकते हैं।
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