Vans Electroengineerings IPO Listing: रेलवे और मेट्रो के बिजली सिस्टम के लिए अहम प्रोडक्ट बनाने वाली वंस इलेक्ट्रो के शेयरों की आज BSE SME पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 628 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹118 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹224.20 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 90% का लिस्टिंग गेन (Vans Electro Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹235.40 (Vans Electro Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 99.49% मुनाफे में हैं। चूंकि लॉट साइज 1200 शेयरों का था तो हर लॉट पर आईपीओ निवेशक ₹140880 मुनाफे में हैं।
Vans Electro IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च
वंस इलेक्ट्रो का ₹34 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 628.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 281.65 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1,031.87 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 686.32 गुना भरा था लेकिन एंप्लॉयीज का हिस्सा महज 0.95 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 28.80 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹25.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।
Vans Electroengineerings के बारे में
वंस इलेक्ट्रोइंजीनियरिंग्स मुख्य रूप से रेलवे, मेट्रो और रिन्यूएबल एनर्जी में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और कंपोनेंट्स बनाती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में सिंगल और डबल पोल VCB (वैक्यूम सर्किट ब्रेकर) और वैक्यूम इंटरप्टर हैं। इसकी मुख्य ग्राहक इंडियन रेलवेज और रेलवे कॉन्ट्रैक्टर्स हैं।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह रॉकेट की स्पीड से लगातार मजबूत हो रही है। इसका शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 2024 में ₹2 लाख और वित्त वर्ष 2025 में ₹1.72 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में ₹5.39 करोड़ पर पहुंच गया। टोटल इनकम भी वित्त वर्ष 2024 में ₹2.76 करोड़ और वित्त वर्ष 2025 में ₹13.82 करोड़ से वित्त वर्ष 2026 में ₹23.19 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹2.55 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹7.17 करोड़ पड़े थे।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।