Investment Mantra : इस समय सभी निवेशकों की नजर अपने पोर्टफोलियो पर टिकी है। निवेशकों को समझ नहीं आ रहा कि अपने म्यूचुअल फंड्स फोलियो के साथ क्या करें। समस्या तब दोगुनी हो जाती है जब पोर्टफोलियो में सेक्टोरल फंड्स हैं। सेक्टोरल फंड्स में क्या करें और अगर मुनाफा है तो टैक्स हार्वेस्टिंग का इस्तेमाल कर कैसे मुनाफे को बचा सकते हैं? इसपर बात करने के लिए हमारे साथ हैं Moneyfront के को-फाउंडर, & CEO मोहित गंग। पहले सेक्टोरल इंडेक्स के रिटर्न पर एक नजर डाल लेते हैं।
सेक्टोरल इंडेक्स का रिटर्न
निफ्टी अपने 52 वीक हाई से 11.5 फीसदी, बैंक निफ्टी 12 फीसदी, निफ्टी पीएसयू बैंक 12 फीसदी, निफ्टी इंफ्रा 9.2 फीसदी, कैपिटल मार्केट्स 9.4 फीसदी, निफ्टी FMCG 11.1 फीसदी, निफ्टी कंज्मपशन 15 फीसदी, निफ्टी IT 27.7 फीसदी, निफ्टी ऑटो 14.5 फीसदी और निफ्टी मेटल 7.2 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है।
बैंकिंग & BFSI, ऑटो, एनर्जी & पावर आउटपरफॉर्म कर रहे हैं। वहीं, PSU बैंक, इंफ्रा, कैपिटल गुड्स/ मैन्युफैक्चरिंग मजबूत दिख रहे हैं।जबकि, इंडिया कंज्मप्शन, टेक & IT अंडरपरफॉर्म कर रहे हैं।
एक्सपर्ट की सलाह है कि बैंकिंग & BFSI, टेक & IT और कंज्मपशन & FMCG में एसआईपी के जरिए निवेश करें। एनर्जी & पावर और PSU बैंक में बने रहें।
टैक्स हार्वेस्टिंग क्या है?
मोहित गंग ने बताया कि टैक्स हार्वेस्टिंग टैक्स बचाने का एक तरीका है। इसमें पोर्टफोलियो के घाटे वाले शेयर/फंड को जानबूझकर बेचा जाता है। इस घाटे का इस्तेमाल उसी साल के मुनाफे को कम करने के लिए किया जाता है। इसका मतलब है 'घाटे से मुनाफे को काटना'ताकि टैक्स कम लगे।
टैक्स हार्वेस्टिंग कैसे काम करता है?
इसमें आप अपने पोर्टफोलियो में नुकसान में चल रहे निवेश की पहचान करते हैं। आप उन शेयरों/फंड्स को बेचकर अपना घाटा 'बुक' करते हैं। इस घाटे को कैपिटल गेंस से सेट-ऑफ करते हैं। अमूमन ये वित्त वर्ष के एक दो दिनों में की जाती है। चाहें तो अगले दिन घाटे वाले शेयर दोबारा खरीद सकते हैं।
टैक्स हार्वेस्टिंग के फायदे
इससे नेट टैक्स देनदारी में कमी आती है। यानी टैक्सेबल मुनाफे में कमी आती है। टैक्स का बोझ सीधा कम हो जाता है। घाटे को 8 सालों तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। खराब प्रदर्शन करने वाले शेयरों से बाहर निकलने और बेहतर अवसरों में निवेश के मौके मिलते हैं।
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