Zomato Share Price: Zomato के शेयरों पर बिकवाली दबाव को देख पुराने इनवेस्टर्स भी साथ छोड़ रहे हैं। Moore Strategic Ventures ने जोमैटो में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है। उसने प्रति शेयर 44 रुपये प्राइस पर जोमैटो के 4.25 करोड़ शेयर बेच दिए हैं। यह ब्लॉक डील करीब 187 करोड़ रुपये में हुई है। मूरे ने जोमैटो के ये शेयर 191 करोड़ रुपये में खरीदे थे। इस तरह उसे 4 करोड़ रुपये लॉस हुआ है।
Moore ने आईपीओ से पहले Zomato में इनवेस्ट किया था। कंपनी फाइलिंग के मुताबिक, उसने जनवरी 2021 में नेक्सस वेंचर्स से 6,347 कंपल्सरी कनवर्टिबल सीरीज जी शेयर 191 करोड़ रुपये में खरीदे थे। पिछले साल जब जोमैटो ने आईपीओ पेश किया तो इन स्पेशल शेयरों को 4.25 करोड़ नॉर्मल शेयरों में बदल दिया गया।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईपीओ से पहले जोमैटो में इनवेस्ट करने वाले कुछ और इनवेस्टर्स भी अपने शेयर बेच सकते हैं। इसकी वजह यह है कि कंपनी की वैल्यूएशन गिरकर 5.5 अरब डॉलर की इसकी आखिरी प्राइवेट मार्केट वैल्यूएशन से नीचे आ गई है।
जोमैटो के शेयरों का एक साल का लॉक-इन पीरियड पिछले हफ्ते (23 जुलाई) को खत्म हो गया है। कंपनी के 78 फीसदी शेयर इस लॉक-इन के दायरे में थे। एनालिस्ट्स का कहना है कि इस हफ्ते जोमैटो के शेयरों पर बिकवाली का दबाव दिख सकता है।
एडवायजरी फर्म InGovern के फाउंडर और एमडी श्रीराम सुब्रमण्यम ने हाल में मनीकंट्रोल से कहा था, "चूंकि अब कोई प्रमोटर नहीं है, फाउंडर्स सहित सभी शेयरहोल्डर्स जिनके पास 77.87 फीसदी हिस्सेदारी है, वे लॉक-इन खत्म होने के बाद बगैर किसी डिसक्लोजर शेयर बेचने के लिए फ्री हैं। इसका बड़ा असर शेयर के प्राइस पर दिखेगा।"
Zomato के शेयर 26 जुलाई को 12 फीसदी गिरकर 41 रुपये पर बंद हुए। इससे अश्वथ दामोदरन की बात सही साबित हुई है। उन्होंने पिछले साल कहा था कि जोमैटो के शेयर की असल वैल्यू 41 रुपये से ज्यादा नहीं है। दामोदरन न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में फाइनेंस के प्रोफेसर हैं। उन्हें वैल्यूएशन गुरु कहा जाता है। उन्होंने कहा था कि 76 रुपये की कीमत पर जोमैटो का शेयर बहुत महंगा है।
इसके उलट ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने जोमैटो के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है। उसने इस शेयर के लिए 100 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। बुधवार (27 जुलाई) को जोमैटो का शेयर 4.44 फीसदी चढ़कर 43.60 रुपये पर चल रहा था।