बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) ने 19 अक्टूबर को 62,245 अंक का अपना उच्चतम स्तर छुआ था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बेंचमार्क निफ्टी ने भी तब 18,604 के स्तर पर पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद से ही इन दोनों स्टॉक में करीब 8 पर्सेंट की गिरावट आ चुकी है और इस दौरान निवेशकों की करीब 14 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई।
सिर्फ शुक्रवार 26 अक्टूबर को मार्केट में करीब 2 पर्सेंट की गिरावट देखी गई। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के इक्विटी स्ट्रैटजी और सीनियर ग्रुप वाइस-प्रेसिडेंट, हेमंग जैनी के मुताबिक इस गिरावट के पीछे बड़ी हाल ही में कोरोना वायरस का नया और अधिक संक्रामक वैरियंट मिलना रहा।
रियल्टी, मेटल्स, बैंक्स और ऑटोमोबाइल शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई। वहीं फार्मा सेक्टर के शेयरों में थोड़ी तेजी रही, जिससे निवेशकों को कुछ राहत मिली।
19 सितंबर को जब मार्केट बंद (Market Cap) हुआ, तब BSE Sensex का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 2,74,69,606.93 करोड़ रुपये था। हालांकि शुक्रवार की गिरावट के सेंसेक्स का मार्केट कैप अब घटकर 2,60,81,433.97 करोड़ रुपये पर आ गया। शुक्रवार को सेंसेक्स करीब 1687 और निफ्टी करीब 509 अंक गिरकर बंद हुए।
19 अक्टूबर के बाद से सेंसेक्स में आई गिरावट से कोई भी सेक्टर अछूता नहीं है। सबसे अधिक गिरावट BSE मेटल्स इंडेक्स में आई, जो इस दौरान करीब 13.6 पर्सेंट लुढ़का। BSE एनर्जी इंडेक्स इस दौरान 10 पर्सेंट टूटा, जबकि BSE बैंकेक्स (BSE Bankex) 8.2 पर्सेंट गिरा। BSE फाइनेंस इंडेक्स में 7.37 पर्सेंट की गिरावट आई। वहीं BSE FMCG इंडेक्स में 7.04 पर्सेंट, BSE IT इंडेक्स 6.68 पर्सेंट, BSE ऑयल एंड गैस 6.1 पर्सेंट, BSE ऑटो 6.01 पर्सेंट और BSE रियल्टी इंडेक्स में 5.74 पर्सेंट की गिरावट आई है।
इसी अवधि के दौरान BSE मिडकैप और स्मॉलकैप क्रमश: 5.65 पर्सेंट और 4.6 पर्सेंट नीचे गिरा हैं।