Stocks to Sell: ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों पर दबाव लगातार बना हुआ है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने अपनी नई रिपोर्ट में संकेत दिया है कि मौजूदा हालात में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के शेयरों में गिरावट का जोखिम काफी अधिक है। ब्रोकरेज ने कहा कि उसके बेयर-केस सिनारियो में यह स्टॉक 49% तक टूट सकता है।
सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इससे OMC कंपनियों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि इससे मूल समस्या पूरी तरह हल नहीं हुई है। मिडिल ईस्ट संकट से पहले OMC कंपनियों के लिए सामान्य मार्जिन का ब्रेक-ईवन स्तर दुबई क्रूड के लगभग $70 प्रति बैरल के आसपास था। हालांकि, रुपये की कमजोरी के कारण यह स्तर घटकर $67 प्रति बैरल तक आ गया है।
अब एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद यह ब्रेक-ईवन स्तर बढ़कर $78 प्रति बैरल हो गया है, लेकिन मौजूदा कच्चे तेल की कीमतें करीब $122 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। ऐसे में कंपनियों पर लागत का दबाव अभी भी काफी ज्यादा है।
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, मौजूदा स्थिति में OMC कंपनियों का EBITDA लॉस रन-रेट अभी भी ऊंचा बना हुआ है और यह 2022 के पीक स्तर से भी ज्यादा है। यानी कंपनियां अभी भी नुकसान के दौर से गुजर रही हैं, भले ही टैक्स कटौती से कुछ राहत मिली हो।
ब्रोकरेज के मुताबिक, OMC सेक्टर में सबसे कमजोर रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल फिलहाल इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) का दिख रहा है। ब्रोकरेज ने कहा कि उसके बेयर केस सिनारियो में यह शेयर मौजूदा स्तर से 49% तक गिर सकता है। वहीं बेस केस में भी इसमें करीब 20 प्रतिशत तक की गिरावट का अनुमान लगाया गया है।
BPCL और HPCL पर न्यूट्रल रुख
गोल्डमैन सैक्स ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) पर ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखी है। HPCL के मामले में डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी से कुछ राहत मिलने की बात कही गई है, क्योंकि इससे घरेलू कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
रिलायंस और रिफाइनिंग सेक्टर पर असर
दूसरी ओर, सिटीग्रुप का कहना है कि सरकार के हालिया टैक्स फैसलों से OMC कंपनियों को राहत तो मिलेगी, लेकिन इससे रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिफाइनिंग बिजनेस के अपसाइड पर कुछ सीमा लग सकती है। इसके अलावा सरकार ने डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और जेट फ्यूल पर 29.5 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई है, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
ONGC के लिए पॉजिटिव संकेत
हालांकि, अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए स्थिति थोड़ी बेहतर है। इस बार सरकार ने विंडफॉल टैक्स नहीं लगाया है, जिससे ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) को कच्चे तेल के दाम में उछाल का पूरा फायदा मिल सकता है।
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