Israel Stock Market: ईरान के साथ सीजफायर की खबरों के बाद इजराइल के शेयर बाजारों में आज 24 जून को तूफानी तेजी देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इजराइल और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर सहमति बन गई है और यह समझौता अगरे 24 घंटे में लागू हो जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद, तेल अवीव स्टॉक एक्सचेंज का सबसे प्रमुख इंडेक्स, TA-35 आज कारोबार के दौरान 1.9 फीसदी की उछाल के साथ अपने 52-हफ्तों के रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंच गया। वहीं ब्रॉडर इंडेक्स, TA-125 में भी 1.6 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई। सभी सेक्टोरल इंडेक्स में भी शानदार बढ़त देखी गई। TA-कंस्ट्रक्शन इंडेक्स 1.8 फीसदी चढ़ा, TA-रियल एस्टेटइंडेक्स 2 फीसदी मजबूत हुआ और TA-बैंक्स इंडेक्स में सबसे ज्यादा 3.7 फीसदी की छलांग देखी गई।
पिछले एक सप्ताह में इजराइली शेयर मार्केट कुल मिलाकर 3.2 फीसदी तक चढ़ चुका है। ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर अमेरिका और इजराइल की ओर से संयुक्त कार्रवाई के बाद से ही तेल अवील स्टॉक एक्सचेंज पर तेजी का माहौल है।
व्हाइट हाउस अधिकारी ने किया ट्रंप के मध्यस्थता का खुलासा
संघर्ष विराम से पहले तनाव चरम पर
हालांकि संघर्ष विराम से ठीक पहले मिडिल ईस्ट में तनाव काफी गहाराय गया थआ। अमेरिका ने ईरान की जमीन के अंदर बने परमाणु ठिकानों पर 30,000 पाउंड के वजन वाले बंकर-बस्टर बम गिराए थे। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल दागी, हालांकि किसी भी तरह के नुकसान की रिपोर्ट नहीं आई।
अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों के तुरंत बाद ट्रंप ने दोनों देशों के साथ बातचीत के आदेश दिए। अधिकारी ने बताया, "शनिवार रात उन्होंने अपनी टीम से कहा- ‘ईरानियों से बात करो। नेतन्याहू को फोन मिलाओ। हम शांति लाएंगे।’"
ट्रंप के सैन्य फैसले पर भी उठे सवाल
ट्रंप ने 19 जून को एक बयान में कहा था कि वह अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर दो सप्ताह के भीतर फैसला लेंगे। लेकिन उन्होंने 21 जून की दोपहर तक ईरान के परमाणु ठिकानों पर हवाई हमलों को मंजूरी दे दी थी। इस फैसले से उनके समर्थकों के बीच भी असमंजस पैदा हुआ है क्योंकि ट्रंप अब तक हर मंच से अमेरिको को 'विदेशी युद्धों से दूर' रखने की वकालत करते आए हैं।
ओवल ऑफिस में बनी शांति की योजना
संघर्ष विराम की योजना ओवल ऑफिस में एक दिन तक चली मैराथन मीटिंग के बाद बनी। इस दौरान ट्रंप और नेतन्याहू के बीच सीधी बातचीत हुई। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के मुताबिक, तमाम दबावों के बावजूद ट्रंप ने संयम बरता और अमेरिका के रणनीतिक हितों को ध्यान में रखकर फैसला लिया।
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