टैरिफ वॉर के चलते US में मंदी की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर ग्लोबल इकोनॉमी पर होगा। इस की सबसे ज्यादा मार IT कंपनियों पर पड़ सकती है। कोविड के बाद IT इंडेक्स पहली बार 200 WMA के नीचे फिसला है। दो दिनों में IT इंडेक्स 7 परसेंट टूटा है। कोफोर्ज, परसिस्टेंट, MPHYSIS, LTIMINDTREE 6 परसेंट तक टूटे है।
ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) का कहना है कि टैरिफ वॉर के चलते IT खर्च और बजट को लेकर अनिश्चितता बन रही है। कंपनियों की ना केवल ग्रोथ की रफ्तार थमेंगी बल्कि FY26 में फ्लैट ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि ग्लोबल फाइनेंशियल संकट की आशंका नहीं है। FY26 में FY25 से बेहतर ग्रोथ की उम्मीद थी।
बर्नस्टीन को भारतीय IT कंपनियों में इंफोसिस,कोफोर्ज का शेयर पसंद आ रहा है जबकि बर्नस्टीन ने L&T टेक और टाटा एलेक्सी पर अंडरवेट नजरिया रखा है।
वहीं विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन का कहना है कि बियर केस में ग्रोथ पर ब्रेक लग सकता है और मार्जिन में सुस्ती की आशंका है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि FY26 में इंफोसिस में 7 फीसदी, एचसीएल टेक में 6 फीसदी और एचसीएल टेक में 14 फीसदी की गिरावट आ सकती है।
जेपी मॉर्गन ने FY27 में मिडकैप आईटी के मुनाफे का अनुमान 10-15% घटाया है। जेपी मॉर्गन की Coforge के लिए 13% की गिरावट और Persistent Systems के लिए 25% होगी। जेपी मॉर्गन ने अर्निंग्स सीजन से पहले किसी भी आईटी स्टॉक को खरीदने की सिफारिश नहीं की है।
जेपी मॉर्गन ने कहा कि आईटी सेक्टर पर नतीजे से पहले खरीदारी की सलाह नहीं होगी। सीमित गाइंडेस से गिरावट का खतरा बढ़ा है। सेक्टर में हल्का पोजीशन रखना बेहतर है। इंफोसिस और ग्रोथ मिडकैप पर ओवरवेट नजरिया रखा है।
कोटक के मुताबिक आईटी में आर्थिक मंदी से गिरावट का खतरा रहा। जबकि अनिश्चितता से फैसलों में देरी संभव है । जून तिमाही की ग्रोथ पर असर संभव है। दोबारा आय और EPS अनुमान घटाया है। FY25 से खराब FY26 रह सकता है ।
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