IT Stocks के निवेशकों को लगा जोर का झटका, क्या एंथ्रोपिक का AI टूल आईटी कंपनियों को तबाह कर सकता है?

एनालिस्ट्स ने निवेशकों को सतर्क करते हुए कहा है कि एंथ्रोपिक का टूल आईटी की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे 3 फरवरी को अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई। 4 फरवरी को इंडियन आईटी कंपनियों के शेयर क्रैश कर गए

अपडेटेड Feb 04, 2026 पर 3:55 PM
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एंथ्रोपिक के अपने क्लाउडे एआई चैटबॉट के लिए एक लीगल टूल लॉन्च करने के बाद 3 फरवरी को अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई।

आईटी कंपनियों के शेयर 4 फरवरी को मार्केट खुलते ही क्रैश कर गए। इसकी वजह एंथ्रोपिक का नया लीगल एआई टूल है। एनालिस्ट्स ने निवेशकों को सतर्क करते हुए कहा है कि यह टूल आईटी की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे 3 फरवरी को अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई। 4 फरवरी को इंडियन आईटी कंपनियों के शेयर क्रैश कर गए। निफ्टी आईटी इंडेक्स 7 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया। मार्च 2020 के बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स में यह किसी एक सत्र में आई सबसे बड़ी गिरावट है।

आईटी शेयरों में आई कितनी गिरावट?

Infosys और LTI Mindtree के शेयरों में तो एक समय 8 फीसदी तक की गिरावट दिखी। Persistent Systems, Mphasis और TCS के शेयर भी 7 फीसदी तक लुढ़क गए। टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में से प्रत्येक में करीब 6 फीसदी गिरावट आई। विप्रो का शेयर करीब 5 फीसदी फिसला। इस गिरावट से आईटी शेयरों के निवेशकों को 2 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी।


अमेरिका में भी क्या आईटी शेयरों में बिकवाली हुई?

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, "भारत-अमेरिका ट्रेड डील से शेयरों में तेजी दिखी थी। लेकिन अब उनके सामने बड़ी बाधा आ गई है। अमेरिका में 3 फरवरी को आईटी शेयरों में बिकवाली का असर इंडिया में भी आईटी इंडेक्स पर पड़ा है। चूंकि वैल्यूएशंस पहले से हाई है, जिससे रैली जारी रहने के लिए कोई फंडामेंटल सपोर्ट नहीं है।"

आईटी शेयरों में क्यों आई इतनी ज्यादा गिरावट?

एंथ्रोपिक के अपने क्लाउडे एआई चैटबॉट के लिए एक लीगल टूल लॉन्च करने के बाद 3 फरवरी को अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई। इनवेस्टर्स का मानना है कि इससे सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ जाएगा। एआई डेवलपर एंथ्रोपिक ने पिछले हफ्ते अपने क्लाउडे कोवर्क एजेंट के लिए प्लग-इन लॉन्च किया।

एंथ्रोपिक का टूल क्या-क्या कर सकता है?

एंथ्रोपिक का यह प्लग-इन कई तरह के काम कर सकता है। इसमें लीगल, सेल्स, मार्केटिंग और डेटा एनालिसिस से जुड़े काम शामिल हैं। इससे यह माना जा रहा है कि डेटा और प्रोफेशनल सर्विस इंडस्ट्री में क्रांतिकारी बदलाव आ सकते हैं। पहले यह माना गया था कि एआई का बड़ा आईटी इंडस्ट्री को मिलेगा।

AI क्या आईटी कंपनियों के लिए बड़ा खतरा बनेगा?

INVasset PMS के बिजनेस हेड भाविक जोशी ने कहा कि निफ्टी आईटी इंडेक्स में आई तेज गिरावट को सिर्फ साइक्लिकल कमजोरी की जगह स्ट्रक्चरल डिसरप्शन के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा, "दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लीडर्स की हालिया कमेंट्री से पता चलता है कि मार्केट्स अभी बदलाव के साथ तालमेल दिखा रहा है। AI अब सिर्फ ऑगमेंटिंग सर्विसेज नहीं रह गया है, यह अब ट्रेडिशनल, लेबर आधारित वर्कफ्लोज के बड़ी हिस्से की जगह ले रहा है। "

सर्विसेज के लिए क्या कंपनियों की निर्भरता वेडर्स पर घटेगी?

इससे सर्विस-हेली आईटी मॉडल्स के लिए शॉर्ट-टर्म में चिंता हो सकती है। सिस्टमैटिक्स ग्रुप एनालिस्ट अंबरीश शाह ने कहा कि इंडियन कंपनियां महत्वपूर्ण कोडिंग वर्कफ्लोज के लिए क्लाउडे को इंटिग्रेट करेंगी जिससे बड़ी वेंडर टीम पर उनकी निर्भरता घट जाएगी।

क्या एआई का असर प्राइसिंग और डिलीवरी स्ट्रक्चर पर भी पड़ेगा?

Vibhavangal Anukulakara के फाउंडर और एमडी सिद्धार्थ मौर्य ने कहा कि इंडियन आईटी स्टॉक्स में हुई बिकवाली की वजह फंडामेंटल्स में अचानक गिरावट की वजह सेंटीमेंट पर आधारित प्रतिक्रिया है। एआई के खतरों को लेकर बाजार जरूरत से ज्यादा अंदाजा लगा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि AI के चलते प्राइसिंग और डिलीवरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव दिखेगा।

क्या आगे भी आईटी शेयरों पर दबाव जारी रहेगा?

उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में आईटी शेयरों में उतारचढ़ाव दिख सकता है, क्योंकि इनवेस्टर्स विजिबिलिटी और मार्जिन को लेकर कैलकुलेशन करेंगे। मीडियम टर्म में जो आईटी कंपनियां आईआई की क्षमता का इस्तेमाल करेंगी वे आगे रहेंगे। जो कंपनियां इसमें पीछे रहेंगे, उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा।

आईटी शेयरों के निवशकों को क्या करना चाहिए?

कोटक सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च सुमित पोखराना के हवाले से इंफॉर्मिस्ट ने बताया है कि आईटी शेयरों में आई बड़ी गिरावट अचानक एक प्रतिक्रिया है। यह माना जा रहा है कि कोर सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के क्लाइंट्स की संख्या एआई टूल्स की वजह से घट जाएगी। कोर सॉफ्टेवयर की जगह एआई प्लेयर्स ले लेंगे।

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पोखराना की सलाह है कि इनवेस्टर्स को इंतजार करो और देखो की स्ट्रेटेजी अपनानी चाहिए। उन्हें यह देखना होगा कि ये एआई मॉडल्स इंडियन कंपनियों के लिए कैसे काम करते हैं, क्योंकि इंडियन आईटी कंपनियां अमेरिकी कंपनियों के लिए सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करती हैं।

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