ITC Share Price: 6 महीने में 31% गिरा स्टॉक, क्या अब खरीदारी का मौका? जानिए ब्रोकरेज की राय

ITC Share Price: ITC का शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया है और छह महीनों में करीब 31% टूट चुका है। बढ़े हुए सिगरेट टैक्स ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है या अभी और दबाव बाकी है? जानिए मोतीलाल ओसवाल से।

अपडेटेड Jun 03, 2026 पर 4:33 PM
ITC का शेयर 2026 में अब तक करीब 32% टूट चुका है।

ITC Share Price: सिगरेट और FMCG कंपनी ITC के शेयरों में लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली। बुधवार को BSE पर शेयर 3% तक टूटकर 274.45 रुपये के नए 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। होटल कारोबार के डीमर्जर से पहले सितंबर 2022 के बाद यह शेयर का सबसे निचला स्तर है।

इस साल काफी कमजोर रहा शेयर

ITC का शेयर 2026 में अब तक करीब 32% टूट चुका है। इसके मुकाबले BSE सेंसेक्स में इसी अवधि के दौरान 13.4% की गिरावट आई है। यानी ITC ने बाजार से काफी कमजोर प्रदर्शन किया है। ITC का शेयर बुधवार को 2.29% की गिरावट के साथ 276.75 रुपये पर बंद हुआ।


सिगरेट कारोबार को लेकर क्यों है चिंता?

वित्त वर्ष 2025-26 में ITC के सिगरेट कारोबार ने वॉल्यूम ग्रोथ के दम पर अच्छा प्रदर्शन किया था। हालांकि कंपनी का कहना है कि सिगरेट इंडस्ट्री लंबे समय से ऊंचे टैक्स और कड़े नियमों का सामना कर रही है।

कंपनी के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में टैक्स व्यवस्था में स्थिरता और अवैध कारोबार के खिलाफ सख्ती की वजह से कानूनी सिगरेट इंडस्ट्री को कुछ राहत मिली थी और खोया हुआ कारोबार वापस आने लगा था।

टैक्स बढ़ने से बढ़ी मुश्किल

1 फरवरी 2026 से सरकार ने सिगरेट पर टैक्स का ढांचा बदल दिया। कंपेनसेशन सेस (Compensation Cess) खत्म होने के बाद GST को लेनदेन मूल्य के 28% से बढ़ाकर खुदरा बिक्री मूल्य के 40% के बराबर कर दिया गया। इसके साथ एक्साइज ड्यूटी में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई।

ITC का कहना है कि इससे सिगरेट पर टैक्स का बोझ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। कंपनी के मुताबिक, पहले से ही कड़े नियमों और ऊंचे टैक्स का उद्योग पर कई नकारात्मक असर पड़ा है।

ब्रोकरेज क्या कह रहे हैं?

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, नए टैक्स स्ट्रक्चर के बाद ITC पर सिगरेट टैक्स का बोझ 60% से 65% तक बढ़ गया है। इसका असर संतुलित करने के लिए कंपनी को सिगरेट के दाम करीब 35% तक बढ़ाने पड़ सकते हैं।

ब्रोकरेज का कहना है कि यह हाल के वर्षों में देखी गई सबसे बड़ी टैक्स बढ़ोतरी है। खास बात यह भी है कि टैक्स बढ़ोतरी की घोषणा 1 जनवरी 2026 को हुई, लेकिन इसे 1 फरवरी 2026 से लागू किया गया। आमतौर पर ऐसे फैसले तुरंत या बहुत कम समय में लागू कर दिए जाते हैं।

खरीदें, होल्ड करें या बेचें?

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि अभी सिगरेट कारोबार का आउटलुक पूरी तरह साफ नहीं है क्योंकि कीमतों में बदलाव की प्रक्रिया अभी जारी है। ऐसे में कमाई के अनुमान में आगे भी कटौती की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सबसे अहम बात यह होगी कि ग्राहक बढ़ी कीमतों को किस हद तक स्वीकार करते हैं। मोतीलाल ओसवाल ने वित्त वर्ष 2026-27 में ITC के सिगरेट कारोबार की आय में 15% और EBIT में 19% की गिरावट का अनुमान लगाया है।

फिर भी क्यों नहीं बदली रेटिंग?

ब्रोकरेज का कहना है कि FMCG कारोबार में सुधार और पेपरबोर्ड बिजनेस के मार्जिन बेहतर होने जैसे सकारात्मक संकेत जरूर हैं, लेकिन फिलहाल सिगरेट कारोबार पर दबाव ज्यादा बड़ा है।

अवैध कारोबार से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कीमतें बढ़ाने की सीमित गुंजाइश और वॉल्यूम-मार्जिन के बीच संतुलन की चुनौती निकट भविष्य में ITC के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने शेयर पर 'न्यूट्रल' रेटिंग बरकरार रखी है और 300 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। यह मौजूदा स्तर से 8.4% की संभावित बढ़त दिखाता है।

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