टाटा कैपिटल, LG समेत इन 27 कंपनियों के लिए अहम रहेगी जनवरी, शेयरों में दिख सकती है बड़ी हलचल
IPO Lock In Expiry: जनवरी 2026 शेयर बाजार के लिए अहम रहने वाला है। टाटा कैपिटल और LG समेत 27 कंपनियों के IPO लॉक-इन खत्म होंगे। इससे बाजार में शेयर सप्लाई बढ़ सकती है और कई स्टॉक्स में तेज हलचल देखने को मिल सकती है।
नुवामा की स्टडी दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक खुलने वाले सभी प्री-लिस्टिंग लॉक-इन को कवर करती है।
IPO Lock In Expiry: 2026 में IPO की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। लेकिन 2025 की आखिरी तिमाही में जिन निवेशकों ने बड़े और चर्चित IPO में पैसा लगाया था, उनके लिए जनवरी 2026 बेहद अहम महीना हो सकता है। इस महीने बड़ी संख्या में शेयरों का लॉक-इन खत्म होगा। लॉक-इन खत्म होते ही ये शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे। इससे बाजार में शेयरों की सप्लाई अचानक बढ़ सकती है।
106 कंपनियों के शेयर होंगे ट्रेडिंग के लिए खुलेंगे
Nuvama Alternative & Quantitative Research के एनालिसिस के मुताबिक, दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 106 कंपनियों के प्री-लिस्टिंग शेयरधारकों का लॉक-इन पीरियड खत्म हो रहा है। इन शेयरों की कुल वैल्यू करीब 24 से 26 अरब डॉलर आंकी गई है।
यह एक बड़ी रकम है और इसी वजह से यह दौर निवेशकों और ट्रेडर्स दोनों के लिए काफी संवेदनशील माना जा रहा है।
क्या सारे शेयर बाजार में बिक जाएंगे
नुवामा ने साफ किया कि इतनी बड़ी वैल्यू होने के बावजूद जरूरी नहीं कि सारे शेयर बाजार में बिकने के लिए आ ही जाएं। इन शेयरों का बड़ा हिस्सा प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप्स के पास है। ऐसे में कई प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने का फैसला कर सकते हैं।
लेकिन इसके बावजूद, जैसे ही लॉक-इन खत्म होता है, ट्रेडिंग एक्टिविटी बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण ये तारीखें निवेशकों के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं।
जनवरी 2026 में सबसे ज्यादा लॉक-इन एक्सपायरी
नुवामा की यह स्टडी दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक खुलने वाले सभी प्री-लिस्टिंग लॉक-इन को कवर करती है। कुल 106 कंपनियों में से जनवरी 2026 अकेले सबसे बड़ा महीना है, जब बड़ी संख्या में कंपनियों के शेयर ट्रेडिंग के लिए खुले होंगे।
यानी साल की शुरुआत में ही बाजार पर सप्लाई का दबाव देखने को मिल सकता है।
जनवरी 2026 में जिन कंपनियों का IPO लॉक-इन खुलेगा
कंपनी का नाम
लॉक-इन खुलने की तारीख
लॉक-इन शेयर (लाख में)
कुल शेयरों का प्रतिशत
Glottis
1 जनवरी
21 लाख
2 प्रतिशत
All Time Plastics
1 जनवरी
40 लाख
6 प्रतिशत
HDB Financial Services
2 जनवरी
4,815 लाख
58 प्रतिशत
Allied Blenders & Distillers
2 जनवरी
559 लाख
20 प्रतिशत
Sambhv Steel Tubes
5 जनवरी
1,421 लाख
48 प्रतिशत
Om Freight Forwarders
5 जनवरी
6 लाख
2 प्रतिशत
Globe Civil Projects
5 जनवरी
305 लाख
51 प्रतिशत
Brigade Hotel Ventures
5 जनवरी
140 लाख
4 प्रतिशत
Advance Agrolife
5 जनवरी
29 लाख
4 प्रतिशत
WeWork India
6 जनवरी
104 लाख
8 प्रतिशत
Tata Capital
7 जनवरी
712 लाख
2 प्रतिशत
LG Electronics India
8 जनवरी
152 लाख
2 प्रतिशत
Crizac
8 जनवरी
1,049 लाख
60 प्रतिशत
Bansal Wire Industries
9 जनवरी
313 लाख
20 प्रतिशत
Travel Food Services
12 जनवरी
872 लाख
66 प्रतिशत
Rubicon Research
12 जनवरी
64 लाख
4 प्रतिशत
Emcure Pharmaceuticals
12 जनवरी
380 लाख
20 प्रतिशत
Canara Robeco AMC
12 जनवरी
75 लाख
4 प्रतिशत
Canara HSBC Life
13 जनवरी
354 लाख
4 प्रतिशत
Smartworks Coworking
16 जनवरी
312 लाख
27 प्रतिशत
Midwest
19 जनवरी
6 लाख
2 प्रतिशत
Capital Infra Trust
19 जनवरी
747 लाख
27 प्रतिशत
Laxmi Dental
20 जनवरी
71 लाख
13 प्रतिशत
Anthem Biosciences
22 जनवरी
3,872 लाख
69 प्रतिशत
BlueStone Jewellery
28 जनवरी
7 लाख
0.5 प्रतिशत से कम
GNG Electronics
29 जनवरी
718 लाख
63 प्रतिशत
Indiqube Spaces
30 जनवरी
670 लाख
32 प्रतिशत
बाजार पर असर को नुवामा के तीन बड़े अनुमान
सप्लाई शॉक का खतरा: नुवामा ने उन कंपनियों की पहचान की है, जहां कुल इक्विटी का बड़ा हिस्सा एक साथ बाजार में आ सकता है। ऐसे मामलों में शेयर प्राइस पर दबाव बनने का खतरा ज्यादा होता है। उदाहरण के लिए,
Anthem Biosciences: करीब 69 प्रतिशत शेयर
Travel Food Services: करीब 66 प्रतिशत शेयर
Crizac: करीब 60 प्रतिशत शेयर
इन कंपनियों में लॉक-इन खुलते ही भारी मात्रा में शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।
प्रमोटर की हिस्सेदारी: नुवामा यह भी बताता है कि भले ही कुल डॉलर वैल्यू काफी ज्यादा दिखती हो, लेकिन इसमें से बड़ी हिस्सेदारी प्रमोटर्स के पास है। अगर प्रमोटर अपने शेयर नहीं बेचते हैं, तो बाजार में अचानक सप्लाई का असर कुछ हद तक सीमित रह सकता है।
यही वजह है कि सिर्फ आंकड़ों को देखकर घबराने के बजाय शेयरहोल्डिंग पैटर्न को समझना जरूरी है।
इश्यू प्राइस के मुकाबले परफॉर्मेंस: नुवामा यह भी ट्रैक करता है कि शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले किस स्तर पर ट्रेड कर रहा है। अगर शेयर मुनाफे में है, तो लॉक-इन खत्म होते ही कुछ निवेशक बेचने का फैसला कर सकते हैं।
अगर शेयर नुकसान में है, तो निवेशक होल्ड करना बेहतर समझ सकते हैं। इससे यह अंदाजा लगता है कि किस स्टॉक में बिकवाली का दबाव ज्यादा बन सकता है।
एंकर निवेशकों की भूमिका क्यों है खास
नुवामा के मुताबिक, एंकर निवेशक में म्यूचुअल फंड और विदेशी संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं। ये आमतौर पर IPO के बाद 30 या 90 दिन तक अपने शेयर नहीं बेच सकते।
जब यह अवधि खत्म होती है, तो शेयरों का जो 'ओवरहैंग' बना रहता है, वह हट जाता है। लेकिन अगर उसी समय संस्थागत निवेशक मुनाफावसूली का फैसला करते हैं, तो शेयर प्राइस पर दबाव आ सकता है। इसीलिए नुवामा की सलाह है कि निवेशक इन लॉक-इन एक्सपायरी डेट्स पर खास नजर रखें।
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